Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/functions/common-scripts.php on line 150

बसीबरदहा में जल–जंगल–जमीन पर सबसे बड़ा संकट: 10,000 पेड़ों की कथित कटाई, आदिवासी विरोध पर रोक, मीडिया एंट्री बंद अदानी कंपनी पर गंभीर आरोप..?

सिंगरौली जिले के बसीबरदहा क्षेत्र में जल–जंगल–जमीन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। स्थानीय आदिवासी समुदाय ने आरोप लगाया है कि अदानी कंपनी द्वारा लगभग 10,000 पेड़ों की मनमानी कटाई की जा रही है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि विरोध करने वाले आदिवासियों को रोका जा रहा है, मीडिया को क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया जा रहा, और पूरे इलाके को पुलिस ने घेरा बनाकर सील कर दिया है। आदिवासी ने कहा कि “हम अपनी जान जंगल को सौंप देते हैं, पर जंगल हमसे छीना जा रहा है”आदिवासी समुदाय सदियों से इस जंगल को ही अपनी जीवनरेखा, अपनी मां, और अपनी पहचान मानता आया है। लेकिन अब जब पेड़ फल देने और पूरे पर्यावरण को समृद्ध करने की अवस्था में पहुँच चुके हैं, तो शिकायत है कि कंपनी इन्हीं पेड़ों पर रात-दिन आरी चलवा रही है। एक बुजुर्ग आदिवासी की आंखें भर आईं


“जैसे मां की गोद से बच्चा छीन लिया जाए, वैसे हमारे जंगल छीने जा रहे हैं।”उनका आरोप है कि न तो वन विभाग इस कटाई की निगरानी कर रहा है, न पर्यावरणीय अनुमति की कोई जानकारी साझा की गई है, और न ही ग्रामसभा की सहमति या सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) की प्रक्रिया दिखाई दी है।

पेड़ की कटाई

पुलिस की भारी तैनाती – मीडिया और ग्रामीणों की एंट्री बंद..?

सबसे गंभीर स्थिति तब बनी जब क्षेत्र में मीडिया कर्मियों को प्रवेश से रोका गया स्थानीय लोगों ने बताया कि 1–2 किलोमीटर पहले ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया सभी रास्तों पर बैरिकेड्स लगा दिए गए ग्रामीणों को अपने ही जंगल की ओर जाने से रोक दिया गया किसी प्रकार के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस कंपनी की मदद करती दिख रही है और विरोध करने वाले लोगों को धमकाया जा रहा है।

10,000 पेड़ों की कटाई के बीच उठे सवाल…?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  1. क्या एक नागरिक के लिए पेड़ की अहमियत और कंपनी के लिए हजारों पेड़ काटने का अधिकार बराबर है?
  2. क्या आदिवासियों के पारंपरिक वन-अधिकार सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं?
  3. प्रशासन जनता की सुरक्षा करेगा या कॉर्पोरेट कंपनियों के लिए रास्ता साफ करेगा?
  4. किसके आदेश पर आम जनता को जंगलों से दूर किया जा रहा है और किसी भी तरह का विरोध दबाया जा रहा है?
  5. जब जंगल खत्म होंगे, तो आदिवासियों का जीवन, संस्कृति, रोज़गार और भविष्य कहाँ बचेगा?

पेड़ काटने वाले मजदूर भी भावुक — “कलेजा फट जाता है”मजदूरों ने बताया कि वे इन पेड़ों को वर्षों से बढ़ते हुए देख रहे थे एक मजदूर ने कहा कि “पेड़ काटते समय हाथ कांपता है, पर मजबूरी है… रोज़गार रुक जाएगा तो घर कैसे चलेगा।”यह बात साफ दिखाती है कि यह सिर्फ पर्यावरण का संकट नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी भी बन चुकी है। जिले में प्राकृतिक संपदा का खजाना फिर भी संरक्षण पर सबसे कम ध्यान सिंगरौली देश के सबसे समृद्ध जिलों में से एक है अपार कोयला भंडार विशाल जंगल क्षेत्र और बड़ी-बड़ी कंपनियों की मौजूदगी
लेकिन विकास की कीमत जंगलों की बलि बनकर सामने आ रही है। सरकार कागजों में पर्यावरण संरक्षण की बातें करती है, पर जमीनी स्तर पर हजारों की संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है।

आदिवासी मंत्री भी मौन..?स्थानीय लोग बोले: “यह वीडियो जरूर देखें”..

स्थानीय लोगों ने आदिवासी समुदाय से जुड़े मंत्रिय संपत्तिया उइके,राधा सिंह,और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि“भगवान बिरसा मुंडा का नाम लेकर सरकार अभियान चलाती है, पर आदिवासियों के जंगल उजाड़े जा रहे हैं। मंत्री आंख बंद कर तमाशा देख रहे हैं।”

सवाल: विकास किस कीमत पर? कंपनियों को आसानी से जमीन और जंगल सौंप देना क्या सही है? क्या सरकार यह भूल गई है कि जंगल आदिवासियों की जीवनरेखा हैं, उनकी संस्कृति का केंद्र हैं,और पर्यावरण संरक्षण में उनकी सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यदि यही जंगल उजड़ते रहे, तो केवल प्रकृति ही नहीं, एक पूरी जनजातीय संस्कृति और समुदाय भी खत्म हो जाएगा। “दमन कब तक?”—आदिवासी समाज चेतावनी पर जंगलों को बचाने के लिए तैयार बैठे आदिवासी समुदाय ने सरकार को चेतावनी दी है “यदि सरकार ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो आदिवासी समाज बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होगा।” बसीबरदहा का यह मामला सिर्फ 10,000 पेड़ों की कटाई नहीं है
यह एक समुदाय की पहचान,
एक जिले की पर्यावरणीय विरासत,और सरकार–कंपनी–प्रशासन के गठजोड़ पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

loading...

Warning: Undefined array key "tie_hide_share" in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65

Warning: Trying to access array offset on value of type null in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65
x

Check Also

खेलों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन का संदेश

राष्ट्रीय खेल दिवस पर साइकिल रैली एवं अंडर-17 मैत्री क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित बढ़ता कारवां (BK ...