ग्वालियर।
औद्योगिक उपभोक्ताओं,गैर घरेलू उपभोक्ताओं के बिलों से 5-5 साल पुराने ऑडिट रिकवरी राशि को हटाए जाने एवं उसकी वसूली पर रोक लगाने की मांग चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा की गई है। इस संदर्भ में चैंबर ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को पत्र लिखा है।
चैंबर अध्यक्ष विजय गोयल, संयुक्त अध्यक्ष प्रशांत गंगवाल, उपाध्यक्ष पारस जैन व मानसेवी सचिन प्रवीण अग्रवाल समेत अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा गैर घरेलू एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं के ऊपर 5-5 साल पुरानी ऑडिट रिकवरी निकाली गई है। यह राशि उपभोक्ता के नियमित बिल में जोड़ दी गई है। जिससे हजारों में उपभोक्ताओं में असंतोष है। जबकि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 56.2 के मुताबिक कोई भी वसूली जब वह प्रथम बार वसूलनीय थी उसे 2 साल बाद वसूल नहीं किया जा सकता है। विद्युत प्रदाय संहिता के अनुसार नियमित बिल में फिक्स चार्ज, एनर्जी चार्ज आदि के अलावा किसी भी प्रकार का देय राशि को नहीं जोड़ा जा सकता है।
ऊर्जा मंत्री से चैंबर ने की यह मांग
-ऑडिट बिलिंग की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
-ऑडिट द्वारा निकाली गई राशि को नियमित बिल से तत्काल सरचार्ज सहित हटाए जाएं।
-यदि ऑडिट की आवश्यकता हो तो ऑडिट हमेशा गत वित्तीय वर्ष का ही करवाया जाए। ताकि कोई रिकवरी उपभोक्ता पर निकलने पर विद्युत अधिनियम की धारा का उल्लंघन न हो। उपभोक्ता भी अपना पक्ष रख सकेगा।
-नियमित बिल के अलावा कोई राशि नियमित बिल में न जोड़ी जाए। इसके अतिरिक्त कोई बिलिंग निकलती है तो पूरी डिटेल के साथ उपभोक्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए, जिसके बाद बिलिंग को अंतिम किया जाए।
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