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एमपी में 17 दिन का ड्रामा, 7 किरदार , नरेंद्र सिंह तोमर,सिंधिया हीरो, कमलनाथ लूजर, शिवराज गेनर और दिग्विजय विलेन रहे; जफर,नरोत्तम, ने बैकस्टेज संभाला,

ग्वालियर/भोपाल – पिछले 17 दिन सेमप्र में जो सियासी ड्रामा चल रहा था, वो लगभग खत्म हो गया। इस पूरे ड्रामे के 7 बड़े किरदार हैं, जिनके अपने-अपने रोल हैं। इस पूरे ड्रामे के हीरो रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया। क्योंकि उनके कांग्रेस छोड़ते ही और भाजपा में शामिल होते ही तय हो गया था कि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार बनने जा रही है। इस ड्रामे से सबसे ज्यादा नुकसान में कमल नाथ और सबसे ज्यादा फायदे में नरेंद्र सिंह तोमर, रहे। कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह को विलेन के तौर पर पेश किया गया, क्योंकि कई कांग्रेस के ही नेताओं ने कहा कि ये सबकुछ जो हो रहा है, वो राज्यसभा जाने के लिए हो रहा है। इन चार के अलावा और अहम किरदार हैं, जिन्होंने परदे के पीछे से सरकार बनाने की तैयारी की। ये किरदार हैं- नरेंद्र सिंह तोमर,जफर इस्लाम, औरनरोत्तम

स्क्रिप्ट राइटर : नरेंद्र सिंह तोमर

कमलनाथ सरकार का तख्ता पलट करने और मध्य प्रदेश में दोबारा से भाजपा सरकार बनाने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को मिली थी। सिंधिया की नाराजगी का अंदाजा लगते ही तोमर को ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की जिम्मेदारी मिली। ग्वालियर-चंबल सिंधिया का गढ़ माना जाता है। कांग्रेस के जिन 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उनमें से 15 ग्वालियर-चंबल से ही आते हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि कुछ दिनों से तोमर के दिल्ली के घर पर मध्य प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं का आना-जाना बढ़ गया था। इसके अलावा तोमर भी अपने क्षेत्र ग्वालियर का बार-बार दौरा कर रहे थे

हीरो : ज्योतिरादित्य सिंधिया

इस पूरे ड्रामे में सबसे बड़ा रोल ज्योतिरादित्य सिंधिया का रहा। उनके पार्टी छोड़ने और उनके समर्थक विधायकों के इस्तीफे की वजह से ड्रामा बढ़ता गया। इसका कारण था बार-बार कांग्रेस की तरफ से नजरअंदाज किया जाना। दरअसल, 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को आगे रखा। माना जा रहा था कि कांग्रेस के जीतने पर सिंधिया मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन उनकी जगह कमलनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया गया। उसके बाद सिंधिया के मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने की भी बात चल रही थी, लेकिन उनकी इस मांग को भी कांग्रेस ने नहीं माना। आखिरकार राज्यसभा चुनाव के लिए जब सिंधिया की जगह दिग्विजय का नाम चला, तो उन्होंने 10 मार्च को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। 11 मार्च को सिंधिया भाजपा में आए और कुछ ही घंटों में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बना दिया।

डायरेक्टर : जफर इस्लाम

सिंधिया की कांग्रेस से नाराजगी का फायदा उठाया भाजपा ने और इसमें उसकी मदद की जफर इस्लाम ने। भाजपा प्रवक्ता जफर इस्लाम और सिंधिया के रिश्ते बहुत पुराने हैं। इसकी शुरुआत जफर के बैंकिंग करियर के दौरान तब हुई थी जब सिंधिया यूपीए सरकार में वाणिज्य मंत्री थे। मप्र की राजनीति में आने के बाद भी सिंधिया जब कभी दिल्ली में रहते थे, तो जफर से उनकी मुलाकात होती रहती थी। लेकिन जफर पिछले पांच माह से ज्योतिरदित्य को भाजपा में लाने के लिए उनसे लगातार मिल रहे थे। कहा तो ये भी जा रहा है कि सिंधिया ने अपनी तरफ से भाजपा में आने की पेशकश की थी।

लूजर : कमलनाथ

इस पूरे ड्रामे से सबसे बड़ा लूजर कोई साबित हुआ है, तो वो है कमलनाथ। 40 साल तक छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद रहे कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने के लिए विधायक बने। लेकिन 15 महीने के अंदर ही उन्हें मुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ा।

गेनर : शिवराज सिंह चौहान

15 सालों तक सत्ता में रही भाजपा सरकार जब दिसंबर 2018 में चुनाव हार गई, तो उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक करियर पर भी सवाल खड़े होने लगे थे। खबरें थीं कि शिवराज को केंद्र में भेजा जा सकता है लेकिन उन्होंने मध्य प्रदेश में ही रहने की इच्छा जताई। शिवराज हार के बाद भी प्रदेश में सक्रिय रहे। शिवराज ने इसी साल जनवरी में सिंधिया से मुलाकात भी की थी। हालांकि, इसे उन्होंने शिष्टाचार भेंट बताया था। इस पूरे ड्रामे से सबसे ज्यादा फायदे में शिवराज रहे।

विलेन : दिग्विजय सिंह

इसके दो तर्क सामने आए हैं। पहला ये कि सिंधिया के भाजपा में आने से एक हफ्ते पहले कांग्रेस के जिन 6 विधायकों के नाम सामने आए थे, उनमें से 2 विधायक दिग्विजय के करीबी माने जाते हैं। पहले थे- ऐदल सिंह कंसाना और दूसरे थे- बिसाहूलाल सिंह। ये दोनों मध्य प्रदेश में जब दिग्विजय की सरकार थी, तब मंत्री थे। लेकिन कमलनाथ की सरकार में इन्हें जगह नहीं मिली। दूसरा तर्क कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे उमंग सिंघार ने ही दिया था। सिंघार ने ट्वीट कर कहा था- यह राज्यसभा में जाने की लड़ाई है, बाकी आप सब समझदार हैं। कई बार ये बातें उठ चुकी हैं कि राज्यसभा जाने के लिए दिग्विजय ने ही पूरा सियासी ड्रामा रचा।

साइड एक्टर : नरोत्तम मिश्रा

कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु भेजने और फ्लाइट से आने-जाने में जिस भाजपा नेता का नाम सबसे ज्यादा बार सामने आया, वो था नरोत्तम मिश्रा का। कांग्रेस की तरफ से जब भी भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया, तो जवाब देने नरोत्तम ही आगे आए। मध्य प्रदेश में जब सियासी ड्रामा शुरू ही हुआ था, तब नरोत्तम ने कहा था कि उनके संपर्क में कांग्रेस के 15 से 20 विधायक हैं। दिग्विजय सिंह ने भी दावा किया था कि बेंगलुरु के जिस रिसॉर्ट में कांग्रेस विधायक ठहरे थे, वहां नरोत्तम मिश्रा भी थे। कांग्रेस के बागी विधायकों को संभालना हो या भाजपा के विधायकों को एकजुट रखना हो, सारा काम नरोत्तम मिश्रा ने ही किया है।

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