ग्वालियर-
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने मैरिज गार्डनों को तीन दिन में शपथ पत्र पेश करने का आदेश दिया है, जिन्होंने नियमों के पालन के संबंध में जानकरी कोर्ट में पेश नहीं की है। कोर्ट ने कहा कि भूमि विकास नियमों का पालन कितने गार्डन कर रहे हैं। पार्किंग के लिए कितनी जगह संरक्षित है। यह जानकारी पेश की जाए। शादी की बुकिंग की भी जानकारी देनी होगी। 24 मार्च को पुनर्विचार याचिका की फिर से सुनवाई हो सकती है।
जिला प्रशासन ने भूमि विकास नियम का हवाला देते हुए शहर के 57 मैरिज गार्डनों को सील कर दिया था। ये मैरिज गार्डन 10 हजार स्क्वायर मीटर से कम एरिया में संचालित थे। मैरिज गार्डनों के सील होने के बाद संचालकों में हड़कंप मच गया। उसके बाद मैरिज गार्डन संचालकों ने उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मैरिज गार्डन एसोसिएशन की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर की है। रिव्यू याचिका में तर्क दिया कि भूमि विकास नियम 2012 गार्डनों पर लागू नहीं हो सकता है। इस नियम के अनुसार गार्डन तैयार किया गया तो गरीब लोग उसका भार नहीं उठा पाएंगे। जनहित याचिका में जो आदेश दिए गए हैं, उनमें भी बदलाव किया जाए। हाईकोर्ट ने 2012 से पहले बने मैरिज गार्डनों को राहत दे दी थी, लेकिन 2012 के बाद बने मैरिज गार्डनों से शादी बुकिंग की शपथ पत्र पर जानकारी मांगी थी। इन गार्डनों को भी राहत मिल गई। कोर्ट ने कितने गार्डन नियमों का पालन कर रहे हैं, उसकी जानकारी शपथ पत्र पर मांगी थी। एसोसिएशन के 110 सदस्यों ने अपनी जानकारी पेश कर दी, लेकिन 50 गार्डन अभी रह गए हैं। कोर्ट ने इन गार्डनों को भी शपथ पत्र पर जानकारी पेश करने का आदेश दिया है।
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