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हनीट्रैप कांड-एक दर्जन फोन और लपटॉप बरामद कर चुकी है क्राइम ब्रांच

इंदौर-मप्र केसनसनीखेज हनीट्रैप कांड की आरोपित महिलाएं जिन एनजीओ के माध्यम से अधिकारियों और रसूखदार नेताओं से नजदीकियां बढ़ाती थीं, उनकी जांच एजेंसियों ने उनकी भी जांच शुरू कर दी है। उधर शिकायतकर्ता हरभजन सिंह से भी पुलिस और अन्य एजेंसियां पूछताछ कर ब्लैकमेलिंग व हनीट्रैप कांड की कड़ियां जोड़ने का प्रयास करेंगी। उधर पुलिस ने छहों आरोपितों से 12 मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
पूछताछ में एक आरोपी बोली- मुझे ज्यादा परेशान मत करो। मैंने एक फोन लगा दिया तो सबको समझ में आ जाएगा मैं कौन हूं।
गुलमर्ग वैली (गुलमोहर कॉलोनी) निवासी 60 वर्षीय हरभजन पिता सरदार बख्तावरसिंह की शिकायत पर पलासिया पुलिस ने श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा भटनागर सोनी, आरती दयाल, मोनिका यादव उर्फ सीमा और चालक ओमप्रकाश को गिरफ्तार किया था। दोनों श्वेता और बरखा को जेल भेज दिया गया है। आरती, मोनिका व ओमप्रकाश रविवार तक रिमांड पर हैं।
 
नाट्य रूपांतरण : शनिवार को एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र महिला थाना पहुंचीं और दोनों आरोपितों से पूछताछ की। उन्होंने घटनाक्रम का नाट्य रूपांतरण भी करवाया। आरती ने श्वेता के जरिए मिलना और दोस्ती कर संबंध बनाने का पूरा घटनाक्रम बताया।
 
निलंबन की अनुशंसा : मेयर मालिनी गौड़ ने नगर निगम के अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह के निलंबन की अनुशंसा मंत्री जयवर्धन सिंह से की है। मंत्री को पत्र भी लिखा है।
 
नजीओ में अनुदान के बहाने लाखों रुपए ले लेती थीं
 
उधर पुलिस को आरोपित बरखा से जानकारी मिली कि उसने एनजीओ महिला जागृति मंच के नाम से लाखों रुपए की अनुदान राशि प्राप्त की है। इसी तरह श्वेता के एनजीओ में भी लाखों रुपए आए हैं। श्वेता के भाई राजा को धार, इंदौर व सागर में ठेके भी दिलवाए गए थे। पुलिस नगर निगम सहित उन सभी विभागों से भी जानकारी जुटा रही है, जहां राजा को ठेके दिलवाए गए।
 
सवाल पूछने पर झल्लाई आरती बोली, एक फोन लगाते ही चुप हो जाओगे
 
आरती अधिकारियों को पूछताछ में सहयोग नहीं कर रही है। हर सवाल के जवाब टाल जाती है। उन्हीं सवालों के जवाब देती है जिनके बारे में पुलिस वालों को पता है या उनके सामने सबूत रख दिए जाते हैं। शुक्रवार रात को आरती ने झल्लाते हुए एक अधिकारी से कहा कि मुझे ज्यादा परेशान मत करो। मैंने एक फोन लगा दिया तो सबको समझ में आ जाएगा मैं कौन हूं। तुम चुप हो जाओगे। एसआई ने उकसाने के मकसद से कहा कि लगा दो फोन और बता दो मेरा नाम। उधर मोनिका ने आरती से दोस्ती के बारे में बताया कि उसकी फेसबुक के जरिए पहचान हुई थी।
 
दोनों चैटिंग करने लगी और आरती की ऊंची पहुंच व हजारों रुपए खर्च करने की अदा पसंद आने लगी। आरती ने उससे भी यही कहा कि वह खुद एनजीओ संचालित करती है। सहायक के रूप में साथ रख कमीशन का लालच दिया। मोनिका बीएससी छात्रा है। फीस के रुपयों के खातिर आरती के साथ रहने लगी और हरभजन से मुलाकातें शुरू कर दी।
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