ग्वालियर-
सिटी हेल्थ प्लान पर केवल स्वास्थ्य विभाग काम नहीं कर सकता, इसके लिए अन्य विभागों को भी आगे आना होगा। ग्वालियर में पैदा होने वाले बच्चों को वह लाइफ अपॉर्चुनिटी नहीं मिलती। जो केरल व मिजोरम जैसे राज्यों में मिलती है। यह बात कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कही।

सिटी सेंटर स्थित होटल में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सेव द चिल्ड्रन व स्कूल संस्था द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें स्कूल संस्था की अध्यक्ष डॉ.बेनजीर पाटिल ने तैयार किए गए सिटी हेल्थ प्लान के संबंध में सभी को विस्तार से जानकारी दी।
कलेक्टर ने कहा कि सिटी हेल्थ प्लान देश के अन्य शहरों में भी जाएगा। कोई भी कमी इसमें नहीं होना चाहिए। प्लानिंग ऐसी करो कि लगे ‘ग्वालियर के लोगों ने दिमाग लगाया है’
दरअसल स्मार्ट सिटी ग्वालियर में इस हेल्थ प्लान को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जिसके बाद इसे देश की प्रस्तावित अन्य सभी 99 स्मार्ट सिटी में लागू किया जाएगा।
कार्यक्रम में सीईओ स्मार्ट सिटी महीप तेजस्वी, महिला एवं बाल विकास, समाजिक न्याय समेत विभिन्ना विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
‘वजीर नहीं प्यादे जीतते हैं जंग, स्वास्थ्य विभाग को नहीं दिखती खुद की कमी
कार्यक्रम में कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कहा कि सिटी हेल्थ प्लानिंग के तहत अभी विभिन्ना विभागों से चर्चा करने की जरूरत है। शहर के महापौर, विधायकों व पार्षदों के साथ ही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी संवाद स्थापित करने की जरूरत है। क्योंकि वे वास्तविक हालातों से अवगत होते हैं व जमीन पर वही लोग काम करेंगे। वजीरों (अधिकारियों) के साथ बैठक कर ली लेकिन प्यादों से बातचीत जरूरी है। क्योंकि वही सैनिक जंग जिताते हैं
कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को खुद की गलती नहीं दिखाई देती, किसी भी विभाग के साथ में यह परेशानी रहती है। क्योंकि वे इसके अभ्यस्त हो चुके होते हैं। दूसरे लोगों को यह कमी आसानी से दिखाई दे जाएगी। इसलिए भी अन्य विभागों को प्लानिंग में शामिल करना जरूरी है।
ससुराल में सबके बाद खाना खाती है गर्भवती
कलेक्टर ने सामाजिक कुरीतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज महिला ससुराल में सबको खाना खिलाने के बाद अंत में खाना खाती है। फिर चाहें वह गर्भवती क्यों न हो। इस व्यवस्था में परिवर्तन लाया जाना चाहिए।
क्योंकि मां स्वस्थ होगी तो बच्चा भी स्वस्थ रहेगा। वरना 40 किलो की महिला डेढ़ किलो का बच्चा ही पैदा करेगी। 16-18 साल की किशोरियों की आगामी कुछ सालों में शादी हो जाएगी, ऐसे में वे फ्यूचर मदर बनेंगी। जिन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करना जरूरी है।
सैनिक परिवारों को भी करें जागरुक
कार्यक्रम में मौजूद एसपी नवनीत भसीन ने कहा कि ग्वालियर में करीब 4 हजार पुलिसकर्मी हैं, सैनिक व अर्धसैनिक बल व उनके परिजनों को भी स्वास्थ्य को लेकर जागरुक करने की जरूरत है
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