ग्वालियर
कुपोषित से हष्ट-पुष्ट करने के लिए जिन बच्चों को सिविल अस्पताल के एनआरसी (पोषण पुनर्वास केन्द्र) में भर्ती कराया गया हैं, वे पसीना-पसीना होते रहे। गर्मी और उमस के कारण ये नौनिहाल खिलखिलाने की बजाए रोते-बिलखते, कुम्हलाते नजर आए। इन मासूमों का यह हाल बिजली कटौती के कारण हुआ। सुबह से बिजली गुल हो जाने के कारण एनआरसी में पंखे बंद हो गए थे। इस कारण गर्मी से कुपोषित बच्चे और उनकी माताएं पसीना-पसीना होती रहीं। कुपोषित बच्चों की माताओं का कहना है कि बिजली चली जाती है तो ऐसे ही गर्मी और उमस झेलनी पड़ती है।

एनआरसी में 19 कुपोषित बच्चे भर्ती हैं। इनके लिए एनआरसी में पलंग तक नहीं हैं। इस 20 बिस्तर के एनआरसी में महीनों से सिर्फ 15 पलंग ही डले हैं। अब एक साथ 19 कुपोषित बच्चे हो जाने के कारण दूसरे कुछ बच्चों के लिए पलंगों की कमी खल रही है। कुपोषण के खिलाफ जंग लड़ रही सरकार का फोकस प्रदेशभर की एनआरसी पर है, जहां बच्चों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं दी जा रही हैं। कुपोषितों को लाने ले जाने सहित एक कुपोषित बच्चे पर 2000 से 2500 रुपए खर्च किए जा रहे हैें। इतना होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारों की अनदेखी से कुपोषितों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। हाल ये है कि अस्पताल के एनआरसी में बिजली बैकअप की कोई सुविधा नहीं है। इधर गर्मी का पारा 43 डिग्री तक जा पहुंचा है।
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