ग्वालियर
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एक और घाटे का रोना रो रही है, लेकिन फिजूल खर्ची में पीछे नहीं है। सिटी सर्कल (ग्वालियर शहर) सहित रीजन में बिजली के ऑडिट के लिए करोड़ों रुपए खर्च करके ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाए थे, लेकिन इन मीटरों का कोई उपयोग नहीं किया और लगे-लगे खराब हो गए। पुराने मीटरों की हालत से कंपनी ने सबक नहीं लिया और फिर से लगाने शुरू कर दिए हैं। इस बार रीजन में एक लाख 10 हजार 808 मीटर लगाने का टारगेट निर्धारित किया गया है। जिसमें 7 हजार 568 मीटर लगा भी दिए।
बिजली कंपनी ने ऋण लेकर वर्ष 2011 से 2015 के बीच ग्वालियर रीजन के सात सर्कलों के 16 शहरों में त्वरित ऊर्जा सुधार कार्यक्रम चलाया था। इस योजना के तहत किए कामों में एनर्जी ऑडिट के लिए भी ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाए। ट्रांसफार्मर से कितनी बिजली निकली और उपभोक्ता के पास कितनी पहुंची है। इसका ऑडिट मीटर से किया जाना था। इन मीटरों से ऑनलाइन रीडिंग होनी थी। ट्रांसफार्मर पर मीटर लगने के बाद इनकी रीडिंग नहीं हुई। उपयोग नहीं होने से 90 फीसदी मीटर ट्रांसफार्मर पर लगे-लगे खराब हो गए। ग्वालियर शहर में ट्रांसफार्मर पर लगाए 5 हजार 766 मीटर भी खराब हो चुके हैं। अब फिर से कंपनी ने नए मीटर लगाने का टारगेट निर्धारित कर दिया। सिटी सर्कल में 3 हजार 408 मीटर का टारगेट निर्धारित किया है। नए मीटर लगाने की प्रोग्रेस रिपोर्ट अगले हफ्ते ऊर्जा मंत्रालय के प्रमुख सचिव के साथ होने वाली बैठक में पेश की जाएगी। इस संबंध में ऊर्जा मंत्रालय के प्रमुख सचिव आईसीपी केसरी से संपर्क किया तो उनका कहना है कि मैं बैठक में हूं। अभी कुछ नहीं बोल सकता।
मीटर पर आया था 18 हजार तक का खर्च
ट्रांसफार्मर पर एक मीटर लगाने के लिए लगभग 18 हजार रुपए खर्च आया था। इनके लिए सिमें ली गई थीं, लेकिन ग्वालियर शहर वृत्त को जो सिमें मिली थीं, वह अधिकतर मीटर के मोडम में नहीं लगाई गईं। जिन मीटरों में लगाईं, उनसे रीडिंग नहीं ली गई। इस कारण मीटर खराब हो गए। बॉक्स ट्रांसफार्मर पर टंगे हुए हैं।
– मीटरों का उपयोग नहीं होने से करोड़ों रुपए बर्बाद हो गए। क्योंकि कंपनी को ट्रांसफार्मर का लॉस नहीं पता चल पा रहा है। उपभोक्ता पर गलत बिलिंग हो रही है।
– बिजली यूनियनों ने भी इन मीटरों का विरोध किया था। यूनियनों का तर्क था कि कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कर्ज लेकर ऐसे मीटर लगाए जा रहे हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है। इसलिए ट्रांसफार्मर पर मीटर नहीं लगाए जाएं।
सर्कलों में मीटर लगाने का निर्धारित टारगेट
वृत्त ट्रांसफार्मर पर मीटर
ग्वालियर शहर 3408
ग्वा. ओएंडएम 14059
मुरैना 18729
भिंड 13495
शिवपुरी 14270
श्योपुर 19862
गुना 26985
(प्रबंधन ने नए मीटर लगाने का यह टारगेट निर्धारित किया है)
पैसे की बर्बादी है
– बिजली कंपनी में पैसे की बर्बादी है। अगर किसी प्रोजेक्ट के तहत फंड मिलता है तो ऐसा सामान खरीदा जाता है, जिससे अधिकारियों को फायदा हो सके। इसलिए इन मीटरों को लगाया जा रहा है। पुराने मीटर पूरे खराब हो गए और कबाड़े में तौल के भाव बिकते हैं। इन मीटरों का विरोध भी किया था।
एसके जायसवाल, जोन सचिव मप्र विद्युत कर्मचारी फेडरेशन इंटक
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