ग्वालियर-
साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव की पूजा ढैया और साढ़े साती से राहत दिलाएगी। शनि देव को रंक से राजा बनाने वाला देवता माना जाता है। शनिश्चरी अमावस्या को देखते हुए शहर के शनि मंदिरों को आकर्षक रूप से सजाया गया है। इसके अलावा एंती ग्राम स्थित शनि मंदिर में भी भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. एचसी जैन ने बताया कि शनि देव मनुष्य के अच्छे-बुरे कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनि देव न्याय प्रिय देवता हैं। वे ढाई वर्ष तक एक राशि में रहते हैं। वे अच्छे कर्म करने वालों को अच्छा फल देते हैं और बुरे कर्म वालों को बुरा फल प्रदान करते हैं। शनि देव अपनी टेढ़ी नजर से बुरा कर्म करने वालों को अपमान, रोग, बंधन, जेल, कंगाली, दुख, कष्ट देते हैं। शनिवार को मूल नक्षत्र में साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या है। जिन जातकों पर शनि की ढैया, साढ़े साती, महादशा, अंतर्दशा खराब है वे अमावस्या पर शनि देव की आराधना, पूजा, दान, मंत्र जाप आदि से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं। मूल नक्षत्र में अमावस्या होने से शनि देव की पीड़ा से स्थाई और शीघ्र लाभ मिलेगा।
इन राशियों पर साढ़े साती
वृश्चिक, धनु, मकर।
इन पर है ढैया: वृष, कन्या।
यह करें: इन राशि वाले जातकों को तिल के पदार्थ, तेल, काले वस्त्र दान करना चाहिए और शनि देव के साथ हनुमान जी की आराधना करना चाहिए।
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