ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी में पिछले दस साल की अव्यवस्थाओं पर हो रहे मुखर छात्र. सारी हदे तोड़ दी गई थी सुनवाई नहीं होती थी फर्जीवाड़ा खुलेआम चल रहा था सामने आ रहा, सख्त अधिकारीमहकसिंह को ट्रांसफर करा भगा दिया

दो साल में छात्र नेताओं ने प्रदर्शनों के दौरान अपनी हदें पार की हैं। इससे जेयू का माहौल बिगड़ने के साथ ही साख को भी बट्टा लगा है।
परेशान छात्र नेताओं ने
इन आंदोलनों के दौरान प्रोफेसरों से मारपीट, उन्हें कमरे में बंद करने, मारपीट का आरोप लगाया था। ऐसा नहीं है कि किसी एक छात्र संगठन या छात्र नेता ने ही हदें पार की हों, जब जिसको छात्रों की भीड़ समस्याऔर मुद्दा मिला, वे अराजकता पर उतर आए।
इसके बावजूद जेयू के अफसरों ने इस तरह के छात्र आंदोलनों पर लगाम लगाने के लिए कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की। जेयू में सुरक्षा के लिए 90 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, इन पर प्रतिमाह लगभग 10 लाख रुपए खर्च होते हैं लेकिन ऐसे आंदोलनों में यह सुरक्षाकर्मी काम नहीं आते हैं। हंगामों से जेयू की छवि खराब हुई तो नुकसान उन छात्रों को हुआ जो साल भर पढ़ाई करने के बाद उम्मीद करते हैं।
भाजपा के शासन काल में भाजपा समर्थितअखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेताआें ने रेक्टर, रजिस्ट्रार और कुलपति सचिवालय की कुंदी बाहर से लगा दी थी। फीस कम कराने के लिए आंदोलन किया ताे कुलपति के ऑफिस में धरना भी दिया था। एक बार कर्मचारियों से भी मारपीट की घटना हुई थी।
अब कांग्रेस के शासन में एनएसयूआई ने हंगामा शुरू कर दिया है। परीक्षा नियंत्रक को ऑफिस में बंद किया, प्रशासनिक भवन में सभी अफसर, कर्मचारी और छात्रों को ढाई घंटे तक बंद रखा। 31 मार्च 2017 को डॉ. अंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया के छात्रों ने प्रॉक्टर प्रो. आरए शर्मा से हाथापाई की थी तथा डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की कार तोड़ दी थी। प्रबंधन ने अब तक सिर्फ प्रॉक्टर से हुई हाथापाई के मामले में ही एफआईआर करवाई है, अन्य मामलों में पुलिस कार्रवाई से बचता रहा है। जेयू के तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरविंद भदौरिया का कहना है कि कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटनाएं होने से उनमें असुरक्षा की भावना आती है। वहीं जेयू टीचर्स एसोसिएशन के सचिव डॉ. शांतिदेव सिसौदिया का कहना है कि इस तरह की घटनाएं ठीक नहीं हैं, इससे समाज में संस्थान की नकारात्मक छवि बनती है।
क्यों बनी किसकी वजह से बनी नकारात्मक छवि सब जानते
सुरक्षाकर्मी व कैमरे, सुरक्षा में कभी काम नहीं आए : जेयू में सुरक्षा के लिए तीन शिफ्टों में 90 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। पूरे कैंपस में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, लेकिन सुरक्षा में इनका उपयोग दिखाई नहीं देता। 31 मार्च 2017 को प्रो. आरए शर्मा के साथ हुई मारपीट के दौरान सुरक्षाकर्मी खड़े होकर तमाशा देखते रहे। शिक्षक की कार तोड़ने और कुलपति, रजिस्ट्रार तथा रेक्टर के ऑफिस की कुंदी बाहर से बंद करने वालों की पहचान जेयू के सीसीटीवी कैमरे नहीं कर पाए।
देखिए…घटनाएं
28 दिसंबर को एनएसयूआई ने ढाई घंटे तक प्रशासनिक भवन में कुलपति, परीक्षा नियंत्रक, डिप्टी रजिस्ट्रार सहित अफसरों, छात्र-छात्राओं को बंद करके रखा।
22 दिसंबर बीई की परीक्षा तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर आए एनएसयूआई ने परीक्षा नियंत्रक को उनके ऑफिस में बंद कर दिया और जबरन परीक्षा तिथि बढ़वा ली।
31 मार्च 2017 को डॉ. अंबेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने डॉ. अंबेडकर जयंती पर क्विज कॉम्पटीशन की अनुमति को लेकर हंगामा किया। जेयू के चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरए शर्मा से मारपीट की, लॉ संस्थान के प्रभारी डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की कार तोड़ दी। यह आंदोलन लगातार 7 दिन तक चला। हालात यहां तक पहुंचे कि कुलपति के नेतृत्व में शिक्षकों को एसपी ऑफिस तक मार्च कर सुरक्षा मांगनी पड़ी।
27 मार्च 2017 को स्पेशल एटीकेटी परीक्षा कराए जाने की मांग को लेकर े छात्रों ने कुलपति सचिवालय, रजिस्ट्रार, रेक्टर ऑफिस की कुंदी बाहर से बंद कर दी।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने परीक्षा फीस कम करने की मांग को लेकर कुलपति के ऑफिस में ही धरना दे दिया।
अनुनय-विनय से काम नहीं होते थे भ्र्ष्टाचार भाई भतीजावाद पूरी तरह घुसा था, करोड़ों का खेल हुआ हे लोकायुक्त जाँच होना चाहिए
ये शिक्षा के मंदिर हैं, : जीवाजी यूनिवर्सिटी परिसर में हाल ही में हुए दो वाकये बताते हैं कि छात्रों के वेष में यहां कुछगलत छात्र हे । शिक्षकों और स्टाफ को बंधक बनाकर अपनी मांगें मनवाने का काम छात्र तो किसी भी सूरत में नहीं कर सकते। वरना शिक्षा के मंदिर में तो अनुनय-विनय से ही सारे काम हो सकते हैं।
शिक्षकों को डराना-धमकाना, ताले में बंद कर देना, दबाव डालकर अपनी मांगों के समर्थन में कागजों पर दस्तखत करवाना, किसीपरेशान का ही काम हो सकता है,
हैरत है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन भी इन के आगे नतमस्तक है।प्रबंधन को अपनी गरिमा और सम्मान बनाए रखने के लिए सख्ती से पेश आना ही होगा। वरना एडमिशन से लेकर पास कराने तक का ठेका लेने वाले गिरोह इसी तरह हावी होते रहेंगे और शिक्षा के मंदिरों को भ्र्ष्टाचार भाई भतीजावाद कास्थान बनाते रहेंगे।
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