ग्वालियर-जीवाजी विश्वविद्यालय नेफर्जी अंकों से असल अंकसूची बनवाए जाने के फर्जीवाड़े में शामिल 24 छात्रों के खिलाफ जीवाजी विश्वविद्यालय ने पुलिस में आवेदन दे दिया है। विश्वविद्यालय थाना पुलिस जांच के बाद इन छात्रों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करेगी। प्रकरण दर्ज होने के बाद पड़ताल में उन कर्मचारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं,जो इस पूरे खेल में शामिल थे।
जीवाजी विश्वविद्यालय में यूं तो पहले भी कई फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं, लेकिन यह फर्जीवाड़ा अपने आप में नए तरह का कारनामा था। इस बार छात्रों की जो अंकसूचियां तैयार हुई हैं,वह पूरी तरह असली है। उनके बनाए जाने की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। लेकिन इन अंकसूचियों को बनवाने के लिए जो अंक सैल प्रभारी के नाम से भेजे गए,वह पूरी तरह फर्जी और कूट रचना कर भेजे गए थे। जेयू में यह मामला 2 नवम्बर को ही पकड़ में आ गया था, लेकिन उजागर 3 नवम्बर को हुआ था।
इस तरह किया था घालमेल
शासकीय व निजी कॉलेज के कुछ छात्रों ने पहले अपनी अंकसूची में करेक्शन के लिए आवेदन दिया। करेक्शन के लिए उनके आवेदन परीक्षा भवन से अग्रेषित होकर आए। यहां सैल प्रभारी आरडी गुप्ता के फर्जी हस्ताक्षर से आवेदन पत्र पर ही फर्जी अंक दर्ज कर दिए गए। इन अंकों के आधार पर जेयू में परीक्षा कार्य करने वाली फर्म से अंकसूचियां ठीक उसी तरह तैयार हो गईं,जैसे कि अन्य छात्रों की अंकसूचियां बनती हैं।
ऐसे आया था पकड़ में मामला
अंकसूचियां तैयार करने वाली फर्म ने परीक्षा नियंत्रक डॉ.राकेश सिंह कुशवाह से इस बात की शिकायत की थी कि, जेयू कर्मचारी उन अंकसूचियों को बनवाने भेज रहे हैं,जो पहले ही जांच कर बनाई गईं थी। इस बार अंकों में करेक्शन और बताया जा रहा है। फर्म के प्रतिनिधियों का दावा था कि उन्होंने परिणाम पूरी जांच के बाद तैयार किया था। अलवत्ता यह सब बताने के पीछे फर्म की मंशा सिर्फ इतनी थी कि उनसे काम अधिक कराया जा रहा है।
मेरे तो साइन ही नहीं है
मामले में परीक्षा नियंत्रक जब जेयू के परीक्षा भवन पहुंचे तो सैल प्रभारी आरडी गुप्ता ने बताया कि हस्ताक्षर उनके नहीं है। विदित है कि जेयू के परीक्षा भवन में परीक्षा परिणाम संबंधी पूरा डाटा, उत्तर पुस्तिकाएं, ओएमआर आदि रखी जाती हैं।
नकल निराकरण समिति ने की थी सिफारिश
इस मामले में जेयू ने सीधे कार्रवाई न करते हुए नकल निराकरण समिति को मामला सौंपा था। समिति ने इस मामले में सभी 24 छात्रों का परिणाम निरस्त करने को कहा, साथ ही पुलिस प्रकरण दर्ज कराने को कहा था। लंबी कागजी प्रक्रिया के बाद जेयू के कुलसचिव डॉ.आईके मंसूरी ने इस मामले में पुलिस प्रकरण दर्ज करने अपना आवेदन विश्वविद्यालय थाने पहुंचा दिया।
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