अभ्युदय सिंह (डैनी) के खुले पत्र ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठाए तीखे सवाल।
पत्रकार: कुलदीप सिंह (सन्नी)

BK-NEWS/सिंगरौली/मोरवा:- कोयला खनन परियोजनाओं के विस्तार के साथ सिंगरौली में विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इसी बीच कांग्रेस के वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव अभ्युदय सिंह (डैनी) द्वारा लिखा गया एक व्यंग्यात्मक खुला पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस पत्र ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को भी कठघरे में ला खड़ा किया है।
डैनी ने अपने पत्र में विस्थापित परिवारों की पीड़ा को बेहद मार्मिक और तीखे अंदाज में व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला परियोजनाओं के नाम पर वर्षों से बसे घरों, दुकानों और लोगों की आजीविका को बुलडोजर के जरिए मिटाया जा रहा है। उन्होंने लिखा कि “विकास” की इस अंधी दौड़ में सिंगरौली के हजारों लोग अपने ही शहर में बेघर और असहाय बनने को मजबूर हो गए हैं।
पत्र में सरकारी उपक्रम नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के अधिकारियों के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। व्यंग्यात्मक शैली में डैनी ने कहा कि जब प्रभावित परिवार अपने अधिकार—उचित मुआवजा और समुचित पुनर्वास—की मांग करते हैं, तो उन्हें सम्मान के बजाय अपमान, दबाव और कथित रूप से रिश्वत की मांग जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए लिखा कि चुनावी मौसम में जनता के बीच सक्रिय दिखने वाले विधायक और सांसद अब इन पीड़ित परिवारों की समस्याओं से दूरी बनाए हुए हैं। डैनी ने तंज कसते हुए कहा कि जब विस्थापित अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो उनके संघर्ष को “कानून-व्यवस्था का मुद्दा” बताकर दबाने की कोशिश की जाती है, जबकि सच्चाई यह है कि कई परिवार खुले आसमान के नीचे अपने भविष्य को लेकर चिंता में जी रहे हैं।
इस खुले पत्र के माध्यम से अभ्युदय सिंह ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है कि यदि विकास की कीमत आम लोगों के अधिकारों और सम्मान से चुकाई जाती है, तो ऐसा विकास न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने प्रभावित लोगों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत आवाज उठाने की अपील भी की है।
गौरतलब है कि अभ्युदय सिंह (डैनी) इससे पहले भी सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर मुखर रहे हैं और समय-समय पर अपने लेखन के जरिए जनचेतना जगाने का प्रयास करते रहे हैं।
फिलहाल, यह व्यंग्यात्मक पत्र सिंगरौली में विस्थापन और मुआवजा विवाद को लेकर एक नई बहस को जन्म दे चुका है। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और प्रशासन पर पारदर्शी, संवेदनशील तथा त्वरित कार्रवाई करने का दबाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है।
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