
बढ़ता कारवाँ / सिंगरौली जिले में जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने पत्रकार और कर्मचारी संगठनों द्वारा जनहित के मुद्दों को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन को आज नौ दिन हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहा है। यह प्रदर्शन जिले की तीन प्रमुख समस्याओं—स्थानीय रोजगार, प्रदूषण, और पत्रकारों के लिए प्रेस क्लब भवन निर्माण—को लेकर किया जा रहा है।
शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल खड़े हों रहे…
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन इन मुद्दों पर कोई प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार नहीं है। उनका मानना है कि अधिकारियों की निष्क्रियता के पीछे भ्रष्टाचार छुपा हुआ है। उन्होंने कंपनियों और प्रशासन के बीच घूसखोरी के संबंधों पर सवाल उठाए हैं, जिससे अधिकारियों की पोल खुलने का डर हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि प्रशासन उनकी बात सुनने से कतराता है, मानो धृतराष्ट्र की तरह आंखें मूंदे बैठा हो।
धरना प्रदर्शन के दौरान पत्रकार और कर्मचारी संगठनों ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं…
- पुराने कर्मचारियों को रोजगार देना:
प्रदर्शनकारी डोमेन बिल्डकॉन लिमिटेड (डीबीएल) से हटाए गए 868 पुराने कर्मचारियों को पुनः रोजगार देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये कर्मचारी अपनी योग्यता और अनुभव के बावजूद बेरोजगारी झेल रहे हैं, जबकि कंपनी में नए लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से कांडोई और सिक्कल क्षेत्र में पुराने व स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की है। - प्रदूषण पर नियंत्रण:
गोंदवाली क्षेत्र की त्रिमूला स्पंज आयरन इंडस्ट्रीज से फैल रहे प्रदूषण को लेकर प्रदर्शनकारी नाराज हैं। उनका कहना है कि इस प्रदूषण से स्थानीय निवासियों की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। - प्रेस क्लब भवन का निर्माण:
पत्रकारों ने सिंगरौली जिले में एक प्रेस क्लब भवन की मांग की है। उनका कहना है कि प्रेस क्लब भवन से पत्रकारों को न केवल सुविधाजनक कार्यस्थल मिलेगा, बल्कि उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
प्रदर्शनकारी अडिग, प्रशासन बना मूकदर्शक…
धरना स्थल पर बैठे पत्रकारों और कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। प्रदर्शन में कई प्रमुख पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हो रहे हैं, जो प्रशासन की निष्क्रियता की आलोचना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया है और इसे घूसखोरी और भ्रष्टाचार से जोड़कर देखा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को तुरंत धरना स्थल पर आकर प्रदर्शनकारियों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों को लेकर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। सिंगरौली जिले में चल रहा यह धरना प्रदर्शन केवल पत्रकारों और कर्मचारियों का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे जिले के विकास और सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है। प्रशासन की ओर से इस पर चुप्पी न केवल प्रदर्शनकारियों की नाराजगी बढ़ा रही है, बल्कि जिले में जनता के बीच प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब इस आंदोलन पर ध्यान देता है और कितनी जल्दी इन समस्याओं का समाधान निकालता है।
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