
बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली जिले के एक ऐसा शहर जो विकास और व्यवस्था के मामले में तेजी से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन यहां अतिक्रमण की समस्या ने नगर निगम और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जहां एक ओर नगर निगम सिंगरौली गरीब मजदूरों और छोटे दुकानदारों के अतिक्रमण को हटाने में सक्रियता दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के प्रमुख स्थानों पर प्रभावशाली व्यापारियों के अतिक्रमण को नजरअंदाज किया जा रहा है।
राजस्थान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट का मामला निकल कर आई बहार…
जिला कलेक्ट्रेट से चंद कदम दूरी पर स्थित राजस्थान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट पर फुटपाथ कब्जाने का आरोप है। आम जनता के आवागमन के लिए बनाए गए फुटपाथ को इस रेस्टोरेंट ने पूरी तरह से अपने व्यापारिक लाभ के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह न केवल पैदल चलने वाले नागरिकों के लिए असुविधा पैदा करता है, बल्कि यातायात में भी बाधा डालता है।
नगर निगम की दोहरी नीति पर अब स्वालिया खड़े हो रहे हैं…
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने ट्रामा सेंटर के सामने गरीब मजदूरों की छोटी दुकानों को बलपूर्वक हटा दिया। ख़बर यह भी निकल रही है कि उनके सामान को जब्त कर दिया गया और उन्हें वहां से पूरी तरह से हटने के लिए मजबूर किया गया। दूसरी ओर, राजस्थान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट जैसे बड़े व्यापारियों के अतिक्रमण पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
आम जनता का आक्रोश….
स्थानीय निवासियों ने इस मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि नगर निगम का यह रवैया अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण है। गरीबों की आजीविका छीनने में प्रशासन तेज़ी दिखाता है, लेकिन जब बड़े व्यापारियों का मामला आता है तो अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल..?
राजस्थान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि किस तरह फुटपाथ को व्यापारिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। सवाल उठता है कि क्या प्रशासन प्रभावशाली व्यापारियों के दबाव में काम कर रहा है, या फिर यह किसी अन्य प्रकार की साठगांठ का नतीजा है….?
जानता की उमेद आगे की कार्रवाई का इंतजार…?
यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं है, बल्कि प्रशासन की निष्पक्षता और जिम्मेदारी का भी है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि नगर निगम ने जल्द ही इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह मामला बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
सिंगरौली जैसे उभरते शहर में अतिक्रमण की समस्या को नजरअंदाज करना शहर के विकास और व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। राजस्थान स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट जैसे व्यापारिक संस्थानों पर कार्रवाई कर प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वह सभी के लिए समान रूप से कार्य करता है। फुटपाथ को आम जनता के लिए मुक्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
इन सभी मामलों को लेकर नगर पालीक निगम सिंगरौली के कमिश्नर से फोन के माध्यम से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन जवाब नहीं दिया गया…
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