हिम्मत समाचार/BK-NEWS
✒️ कुलदीप सिंह (सन्नी)

BK-NEWS/सिंगरौली/मोरवा:- आज शनिवार को सिंगरौली गुरुद्वारे में बैसाखी का पर्व केंद्रीय रूप से धूमधाम से मनाया गया वैशाखी के पर्व पर गुरुद्वारे को फूलों से सजाया गया बैसाखी का त्यौहार सिख समाज का प्रमुख त्यौहार होता है | यह त्योहार मूल रूप से पंजाब, हरियाणा और

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे धार्मिक व ऐतिहासिक दोनों मान्यताएं मौजूद हैं. इस त्योहार को सिख समुदाय के लोग नववर्ष के रूप में मनाते हैं.
फसल उत्सव से जुड़ा है यह त्योहार
_धार्मिक मान्यता कि मानें तो यह त्योहार फसल उत्सव से जुड़ा है. इसे रवि की फसल के पकने के मौके पर मनाया जाता है. इस दिन से खेतों में रवि फसल के पकने के बाद उनकी की कटाई शुरू की जाती है. किसान अपने खेतों से रवि फसल की कटाई करके आते हैं और शाम के समय आग जलाकर उसके चारों ओर इकट्ठे होते हैं. मूल रूप से यह त्योहार खुशी का प्रतीक है ।

खालसा पंथ की हुई थी स्थापना
_वहीं, इसके पीछे की ऐतिहासिक मान्यता की मानें तो इस दिन सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने 13 अप्रैल 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी. इस पंथ की स्थापना धर्म की रक्षा और समाज की भलाई से उद्देश्य से की गई थी._
साल का पहला दिन है बैसाखी
_बैसाखी को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इसे असम में बिहू, बंगाल में नबा वर्षा, केरल में पूरम विशु कहते हैं. बैसाखी को बैसाखी या मेष संक्रांति भी कहा जाता है. इस दिन सूर्य मेष राशि में करते हैं. बैसाखी को बंगाली कैलेंडर के अनुसार साल का पहला दिन भी माना जाता है. बंगाल में भी इस दिन को काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. बंगाली कैलेंडर में यह दिन काफी खास माना जाता है._
लंगर का होता है आयोजन
_इस दिन गुरुद्वारों को काफी अच्छे तरीके से सजाया जाता है और सिख समुदाय के लोग गुरुवाणी सुनते हैं. साथ ही गरीबों को मुफ्त भोजन देने के लिए भंडारा का भी आयोजन किया जाता है.
_बैशाखी पर्व के अवसर पर ऊर्जांचल के समस्त गुरुद्वारे में तैयारी चल रही थी | सिंगरौली गुरुद्वारे में 11 तारीख को अखण्ड पाठ साहिब का पाठ प्रारम्भ किया गया था। जिसकी समाप्ति आज शनिवार सुबह गुरुद्वारा साहिब में कई गयी।
_आज बैशाखी पर्व के दिन प्रात 11:00 बजे से स्थानीय रागी जत्था सिंगरौली ने कीर्तन किया। बैसाखी के अवसर पर जमशेदपुर से आये रागी जत्था भाई मनजीत सिंह जी ने अमृतवानी से कीर्तन किया।जिसके बाद स्थानीय संगत द्वारा कीर्तन किया। इसके बाद आनंद शाहिब के पाठ की समाप्ति के बाद अरदास फिर गुरु का लंगर की वितरित किया गया।_
_ऊर्जांचल की संगत इस पर्व के उत्साह पूर्वक मनाते हुए सुबह से ही गुरुद्वारे में एकत्रित हो गई। पाठ की समाप्ति 2:30 बजे होने के उपरांत लंगर का प्रसाद वितरण किया गया।
कई स्थानीय लोगों ने प्रसाद लिया।
_जयंत गुरुद्वारा में जयंत,बीना, बैढ़न, शक्तिनगर, रेनू सागर सिंगरौली के गुरुद्वारे में भी सुबह कीर्तन दरबार किया गया। कार्यक्रम में अन्य गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष ,समिति सदस्य के साथ के साथ समस्त साध संगत ने कीतर्न वाणी सुनकर निहाल हुए ।
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