
बढ़ता कारवाँ/:(राजकुमार सिंह/दिनेश पांडेय):- सिंगरौली जिले में माफियाओं की बाढ़ सी आ गई है, आपने अभी तक सीकेडी माफिया, रेत माफिया,भू माफिया,कोल माफिया,डीजल माफिया,कबाड़ माफिया, ही सुना होगा, लेकिन जिले में एक नया माफिया उभरकर सामने आया है वह हैं मुआवजा माफिया। बतादे की जिले में जबसे नई-नई कंपनियां आना सुरू हुई है की मुआवजा माफिया उभरकर सामने आये हैं।जिसके बारे में जानने के लिये अभी तक किसी भी जिम्मेदार ने ईमानदारी से प्रयास नही किया। यही वजह है कि जिले में मुआवजा माफिया के कारोबार का दायरा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब,मजदूर, किसानों और आदिवासियों की जमीन को औने पौने दामों में खरीद फरोख्त कर कंपनियों से मुआवजा की बड़ी राशि के साथ पैकेज की सुविधा हासिल करने का सफल प्रयास किया जा रहा हैं।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि मामले की जानकारी कंपनी प्रबंधन एवं जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को होने के बावजूद भी उक्त मामले की आवाज उठाने की जहमत न करते हुए आराम से उसका हिस्सा बन बैठा गया।।
ऐसा ही एक ताजा मामला नगर निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक 2 मुहेर का आया है। जहां कंपनी प्रबंधन जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि की मिलीभगत से 12 हजार करोड़ का घोटाला होने की आशंका जाहिर करते हुए लखनलाल शाह अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी सिंगरौली (पिछड़ा वर्ग) ने आवाज उठाई है। उन्होंने कलेक्टर सिंगरौली को दिए गये अपने ज्ञापन में कहा है कि नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक 2 मुहेर में एनसीएल द्वारा अधिग्रहण किए जाने वाली भूमियों में व्यापक पैमाने पर फर्जीवाड़ा एवं व्यक्तिगत लाभ लिए जाने के प्रयास किया जा रहे हैं। जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में श्री शाह ने उल्लेख किया है कि एनसीएल सिंगरौली द्वारा मुहेर में जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिसमें एनसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत सामने आई है। कांग्रेस नेता श्री शाह का कहना है कि उक्त सभी लोग मिलकर सरकार को अरबों रुपए के राजस्व का चूना लगाने का प्रयास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मुहेर में हो रहे अधिग्रहण मे अधिकतर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, एवं जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीयों द्वारा मुआवजे के लालच में भारी भरकम निर्माण कार्य करा कर अधिकतम मुआवजा लेने का प्रयास किया जा रहा है। जबकि इस भूमि पर पूर्व में इन लोगों द्वारा कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया था। जैसे ही एनसीएल द्वारा भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ की गई कि मुहेर में व्यापक पैमाने पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया।
अरबो रुपये के घोटाले में एनसीएल प्रबंधन सहित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों का हाथ
:- जानकारी के मुताबिक पूर्व में जब एनसीएल द्वारा जयंत मे भू अधिग्रहण का कार्य किया जा रहा था तब भूमि के विक्रय और खरीदी एवं निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी। परंतु मुहेर में जिला प्रशासन एनसीएल प्रबंधन से मिलीभगत कर खरीद बिक्री और निर्माण कार्य पर कोई रोक नही लगाई। आरोप है कि एनसीएल के अरबों रुपए के घोटाले में एनसीएल प्रबंधन के साथ-साथ जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत है।
उल्लेखनीय है कि वार्ड क्रमांक 2 मुहेर नगर निगम क्षेत्र में आता है। नगरीय क्षेत्र में आने के वजह से भवन निर्माण के पूर्व निगम की भवन अनुज्ञा प्राप्त करना आवश्यक होता है। परंतु मुहेर मे कराए गए निर्माण कार्यों मे किसी भी भूमि स्वामीयो ने भवन निर्माण की अनुज्ञा प्राप्त नहीं की है।
मुहेर में बने नए मकान किसी भी तरह से रिहायशी नही हो सकते
:- मुहेर में हजारों की तादाद में बने न्यू मकान को जहां प्रशासन व एनसीएल प्रबंधन आवासी भवन मानकर अरबों रुपये मुआवजा देने की फिराक में है वह आवासी भवन किसी मायने में नहीं माना जा सकता। जांच किया जाय तो मुहेर में बने किसी भी न्यू मकानों में न तो एक भी विद्युत कनेक्शन है, ना ही किसी घर में शौचालय हैं, और ना ही वहां कोई निवास करते हैं। जितने भी नए मकानों का निर्माण हुआ हैं वह सिर्फ व सिर्फ मुआवजा लेने निमित्त घटिया निर्माण कर, भू माफिया एवं निगम प्रशासन, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, एनसीएल प्रबंधन मिलकर लगभग 12 हजार करोड़ का भ्रष्टाचार कर, भारी भरकम रकम घोटाला करने जा रहे हैं।
जबकि वास्तविक वहां के निवासियों को 10%आ का भी लाभ नहीं मिल पा रहा हैं।
एनसीएल द्वारा अधिग्रहण की जा रही जमीनों का खसरा नंबर:
मुहेर मे एनसीएल द्वारा जो जमीन अधिग्रहण की जा रही हैं, उसका खसरा क्रमांक नंबर इस प्रकार है:– 822 823 284 भाग 1067 भाग 1069 भाग 1070 भाग 1071 भाग 1077 भाग 11 33 1135 भाग 1136 भाग 1137 1138 भाग 1139 11 40 भाग 1141 भाग 1142 भाग 1143 1144 1145 भाग 1146 से 1152 1153 भाग 11 54 भाग 11 55 भाग 1156 भाग 1157 भाग 1158 1159 भाग 11 60 से 1201,1203 भाग 1204 से 1210 1211 भाग 1212 भाग 1215 1249 भाग 1251 1252 भाग 1253 से 1259 भाग 1260 भाग, 1261 भाग, 1262, 1263, 1264 भाग, 1267 भाग, 1268 भाग, 1282 भाग, 1259 भाग, 1550 से 1648, 1649 भाग, 1650, से 1724, 1725 भाग, 1726 भाग, 1729 भाग, 1730 भाग 1731 भाग 1732 से 1744 1745 से 1779 1780 भाग, 1781 1782 भाग 1783 से 1810 1811 भाग 1812 भाग 1822 भाग 1823 से 1829 1830 भाग 1831 से 1835, 1836 भाग, 1837 भाग, 1843 भाग,1844 भाग, 1845 भाग,1851भाग, 1852,1853 भाग, 1854 भाग, 18 56 भाग, कुल 244.536 हेक्टेयर 604.248 एकड़ भूमि एनसीएल द्वारा अधिग्रहित की जा रही हैं। एवं वन विभाग द्वारा संरक्षित वन क्षेत्र में अर्जित किए जाने वाले खसरा क्रमांक 111 भाग 112 भाग 113 114 115 भाग 116 भाग 117 भाग 122 भाग 123 भाग 124 भाग 125 भाग 126 127 भाग और 128 भाग की जमीने भी अर्जित की जा रही हैं। जिसका धारा 4 के पूर्व की स्थिति और वर्तमान की स्थिति मे घर निर्माण की स्पष्ट जांच कराया जाना आवश्यक है। और कितने नगर निगम से भवन अनुज्ञा प्राप्त की है, इससे सारा मामला खुलकर सामने आ जायेगा।
एनसीएल प्रबंधन के मिलीभगत होने से 12 हजार करोड़ रुपए घोटाले का आरोप
आरोप है कि अधिकतर जनप्रतिनिधियों प्रशासन के लोगों एवं पुलिस विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा एनसीएल प्रबंधन से सांठगांठ कर मुहेर ग्राम में हो रहे विस्थापन का लाभ लिया जा रहा है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाय तो अरबों का घोटाला सामने आवेगा। जांच में यह भी खुलासा हो जायेगा कि किन किन लोगों द्वारा निज स्वार्थ बस फर्जी निर्माण कार्य कराया है।और कौन से व्यक्ति यहाँ के स्थाई निवासी हैं।
मुआवजे का जल्द वितरण हेतु स्थानीय नेताओं द्वारा जिला प्रशासन पर बनाया जा रहा दबाव
जानकारी तो यहां तक लगी है कि मुआवजे की राशि का जल्द वितरण कराने हेतु स्थानीय नेताओँ द्वारा जिला प्रशासन से दबाव बनाया जा रहा है। कांग्रेस नेता रामलखन का मांग है कि उक्त फर्जीवाड़े को नजर अंदाज न किया जाय। मुआवजा वितरण की कार्यवाही से पूर्व एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर निष्पक्ष जांच कराने के बाद ही भू अर्जन की कार्यवाही को अंतिम रूप दिया जाय। जिससे फर्जी मुआवजा माफिया का चेहरा बेनकाब होते हुए NCL का लगभग 12 हजार रुपया भी बचाया जा सके ।
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