बढ़ता कारवाँ न्यूज//सिंगरौली//बैढ़न//ब्यूरो कार्यालय

BK NEWS:- जब मामलों के निपटारे की खानापूर्ति होने लगी तो पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लेना शुरू किया।उम्मीद थी कि यह मामले सीधे सरकार तक पहुंचते हैं, इसलिए न्याय मिलेगा, लेकिन पीड़ितों को यहां भी न्याय नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि हेल्प लाइन में आने वाली शिकायतों को झूठी रिपोर्ट देकर निपटारा कर दिया जाता है और पीड़ित परेशान होते रहते हैं।जनपद पंचायत ग्राम पंचायत ढेंकी के एक हितग्राही ने अपनी समस्या के निदान के लिए लगभग एक दर्जन से ज्यादा बार सीएम हेल्प लाइन में शिकायत दर्ज कराई,लेकिन हर बार बिना निराकरण के फर्जी तरीके से अपने कार्यालय में बैठे बैठे अधिकारी कर्मचारी झूठे निराकरण दर्ज कर सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को बंद करवा दिया जाता है।ताज्जुब की बात यह है कि एल1,एल2,एल3 से लेकर एल4 तक के अधिकारी कभी मौके पर जांच या फरियादी से संपर्क कर समस्या का निराकरण कराने के बजाय झूठे निराकरण दर्ज कर बंद कराने में भरोसा रखते हैं

यहां शिकायतें टांग देते हैं अफसर
मुख्यमंत्री भले ही सार्वजनिक मंचों से बार-बार लापरवाह अफसरों को टांग देने की बात कह रहे हों, लेकिन नौकरशाही पर उनके इन सख्त तेवरों का कोई असर होता नजर नहीं आ रहा है। 2014 में शुरू की गई हेल्पलाइन 181 में जिले में हर माह करीब सैकड़ो शिकायतें हो रही हैं, जिनमें से अधिकांश का का समाधान होना बता दिया गया। हकीकत ये है कि जिन शिकायतकर्ताओं को अतिसंतुष्ट बताया गया है उनकी शिकायत जस की तस ही बनी रहती है।
कागजों में हुआ निराकरण
सिंगरौली जिले के जनपद पंचायत बैढन के ग्राम पंचायत ढेंकी में सीएम हेल्प लाइन में फर्जी तरीके से शिकायतों के निराकरण किए जाने का आरोप रामसजीवन सिंह ने लगाते हुए कहा है कि पंचायत में सचिव व रोजगार सहायक बिना चढ़ोत्तरी के कोई कार्य नही करते,तीन वर्ष पहले कपिल कूप धारा के तहत कूप स्वीकृत हुआ लेकिन उस कूप को अधूरा ही खुदाई करके छोड़ दिया गया। 3 वर्ष से कूप में कार्य नही लगाया गया वही उन्होंने बताया कि सचिव व रोजगार सहायक कार्य कराने के लिए 20 हजार रुपये की मांग कर रहे थे।वही हितग्राही ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन से काफी उम्मीद थी। लेकिन यहाँ अधिकारी फर्जी ढंग से उसका निराकरण कर रहे हैं।गौरतलब है कि सीएम हेल्पलाइन पर कोई बड़े मामले की शिकायत करता है तो उसे गंभीरता नहीं लिया जा रहा है। इस योजना के शुरु होने से ग्रामीणों में आस जागी थी लेकिन इसके विपरीत हुआ। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों का कोई निराकरण नहीं है। इसमें हर दूसरा व्यक्ति कहता है कि वहां कॉल करने से कुछ नहीं होता है। कई को शिकायत दर्ज कराए महीनों बीत जाते है लेकिन समस्या का निराकरण नहीं किया गया।जिलेभर में एल1, एल2, एल3 और एल4 की शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं, इनका निराकरण करवाने के लिए जिले के किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं है।कई बार कलेक्टर द्वारा समय-सीमा में शिकायत का निराकरण करने के लिए कहा गया, लेकिन अधिकारियों ने कलेक्टर के आदेश को तवज्जो नहीं दी और मनमाने तरीके से कार्य करते रहे। ग्रामीण अंचलों को सीएम हेल्पलाइन से राहत मिली थी,लेकिन अब इस व्यवस्था से लोगों का विश्वास ही उठता जा रहा है।
कलेक्टर के आदेश को दिखाते हैं ठेंगा
कलेक्टर द्वारा टीएल और अन्य बैठकों के दौरान सभी विभागों के अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन अधिकारी भी बैठक रूम के बाहर आने के बाद कलेक्टर के उस निर्देश काे भूल जाते हैं। कलेक्टर द्वारा निर्देश देने के बाद शिकायतों के निराकरण होने की वजह वह और बढ़ती जा रही है। इससे स्पष्ट होता है कि जिले के अधिकारी कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे है और अपने मनमाने तरीके से कार्य करने में जुटे हुए हैं।
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