ग्वालियर – ट्रेजरी से 80 लाख का सोना गायब होने के मामले मेंहाई कोर्ट की एकल पीठ में गत दिवस केस डायरी पेश की गई। कोर्ट ने बहस के दौरान तल्ख टिप्पणी की कि इस मामले में दो डकैती पड़ी हैं। पहली डकैती 32 साल पहले पड़ी थी। दो हत्याएं करके सोना लूटा गया था और दूसरी डकैती सोने को गायब करके कोर्ट में पड़ी है। डायरी में पुलिस की खानापूर्ति देखते हुए हाई कोर्ट ने लिखित में स्पष्टीकरण मांगा है। आदेश दिया है कि इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है, बिंदुवार पेश करें। 11 अगस्त को याचिका की फिर से सुनवाई होगी।
किला गेट स्थित सोडा कुआं के पास रहने वाले रमेश चन्द्र गोयल सोना चांदी का व्यापार करते थे। 1988 में उनके घर डकैती पड़ी थी। डकैतों ने रमेश चन्द्र गोयल व उनकी पत्नी बसंती गोयल की हत्या कर दी थी। सोना-चांदी और नगदी लूट ले गए थे। पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर उससे 80 लाख का सोना-चांदी बरामद किया था। इस माल को मालखाने (ट्रेजरी) में जमा करा दिया था। यह माल जिला न्यायालय की निगरानी में जमा था। लंबे समय बाद रमेश चन्द्र गोयल के वारिसनों ने सोने को वापस लेने के लिए जिला सत्र न्यायालय में आवेदन लगाया। जब माल वापस नहीं दिया गया तो रुचि अग्रवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 में बक्से को खोला गया, जिसमें सोना-चांदी गायब था। इस मामले में पड़ाव थाने में पूर्व नाजिर के खिलाफ केस दर्ज किया गया, लेकिन वर्ष 2016 के बाद से पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। क्योंकि पूरे मामले की जांच जिला सत्र न्यायालय के न्यायाधीशों तक पहुंच रही थी। यह माल उनकी निगरानी में ट्रेजरी में रखा था। चार साल बाद भी इस मामले में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई। जिसके चलते हाई कोर्ट ने पूरे मामले को अपनी निगरानी में लिया है। गुरुवार को केस डायरी पेश की गई। रुचि अग्रवाल के अधिवक्ता आरके सोनी व अभिषेक बिंदल ने तर्क दिया कि पुलिस गंभीर नहीं है। कोर्ट ने केस डायरी को देखकर नाराजगी व्यक्त की। बहस के दौरान काफी तल्ख टिप्पणियां भी की। अब पूरे मामले में पुलिस का लिखित में पक्ष मांगा है। बिंदुवार जानकारी देनी होगी कि पुलिस ने अबतक क्या कार्रवाई की है।
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