ग्वालियर. कोरोना संक्रमित संदिग्ध और पॉजिटिव मरीजों के अंतिम संस्कार में होने वाली अव्यवस्था कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। शनिवार तड़के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान श्योपुर के चूड़ी बाजार निवासी बाल ब्रह्मचारी सत्यनारायण शर्मा (53) की मौत हो गई थी। उनके शव को एंबुलेंस से उतार कर स्ट्रेचर से अंतिम संस्कार के लिए विद्युत शवदाह गृह ले जाया जा रहा था। स्ट्रेचर को मृतक का भाई विष्णु शर्मा, दो एंबुलेंस व एक नगर निगम का कर्मचारी उठाए हुए थे।
जब शव विद्युत शवदाह गृह के गेट पर पहुंचा तभी स्ट्रेचर का संतुलन बिगड़ गया और शव स्ट्रेचर से नीचे गिर पड़ा। आनन-फानन में पीपीई किट पहने कर्मचारियों ने शव को पुन: उठाकर स्ट्रेचर पर रखा। यह देखकर मृतक का भाई विष्णु शर्मा और भतीजा मनोज शर्मा नाराज हुए। भतीजा बोला-मुझे अगर किट दे देते तो यह स्थिति नहीं होती। यह कहकर भतीजा भावुक हो उठा और फूट-फूटकर रोने ने लगा।
मेरे भाई को बिना ऑक्सीजन के एंबुलेंस से एक अस्पताल से दूसरे में शिफ्ट किया
मेरे बड़े भाई सत्यनारायण शर्मा बाल ब्रह्मचारी थे। उन्हें 4-5 दिन पहले सांस लेने में तकलीफ और खांसी के कारण श्योपुर में भर्ती कराया था। वहीं सैंपल हुआ था। 28 मई को उन्हें ग्वालियर भेज दिया गया। यहां पत्थर वाली बिल्डिंग में वे भर्ती थे। शुक्रवार की रात उनके पॉजिटिव होने की जब खबर आई तो जेएएच के डॉक्टरों ने बिना ऑक्सीजन लगाए ही पत्थर वाली बिल्डिंग से सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल उन्हें मेरे साथ भेज दिया।
एंबुलेंस में उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण काफी परेशानी हो रही थी। अगर ऑक्सीजन की व्यवस्था होती तो शायद भैया जिंदा होते। श्मशान घाट में भी व्यवस्था खराब थीं। भतीजे मनोज शर्मा को पीपीई किट नहीं दी। शव उठाने के लिए आदमी भी कम थे। इस कारण शव गिर गया। अगर पीपीई किट भतीजे को दे दी होती तो कम से कम शव तो नहीं गिरता, हमारा तो भाई चला गया? मैंने और मनोज ने अपना सैंपल जांच के लिए दे दिया है।
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