ग्वालियर- कोरोना संक्रमण की वजह से किए गए लॉकडाउन से व्यापार किस कदर प्रभावित हुआ है, इसका अंदाजा कॉमर्शियल उपभोक्ताओं की हालत से लगाया जा सकता है। सिटी सर्कल में 10 किलो वाट से अधिक का लोड उपयोग करने वाले वाणिज्यिक उपभोक्ता अपना लोड कम करना चाहते हैं। जोन में इसकी अर्जी दे दी है, जिससे लोड कम करके फिक्स चार्ज की बिलिंग बचाई जा सके। क्योकिं उन्हें अपना व्यापार पटरी पर लौटता नहीं दिख रहा है। सबसे ज्यादा आवेदन होटल व रेस्टोरेंट वालों के आए हैं।
कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन की घोषणा की गई है। लॉकडाउन 1, 2, 3 में व्यापार को पूरी तरह से बंद रखा और लॉकडाउन 4 में व्यापारिक संस्थानों को खोलने की अनुमित दी गई, लेकिन बाजार खुलने के बाद भी कुछ व्यापारिक संस्थान ऐसे हैं जिनके शुरू होने की संभावना नहीं है। बिजली का बिल उन्हें पूरा मिल रहा है। घर से बिल जमा करना पड़ रहा है। व्यापारी फिक्स चार्ज की बिलिंग बचाना चाहते हैं। यहां बता दें कि 220 रुपये प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज लिया जाता है। जैसे किसी उपभोक्ता के 50 किलोवाट लोड की बिलिंग हो रही है तो वह आधा ही लोड रखना चाहता है। वह 5500 रुपए बचा सकता है। सिटी सर्कल में करीब 50 से अधिक आवेदन आ चुके हैं, जो अपने लोड को घटाना चाहते हैं। लोड घटने पर उन्हें खपत के अनुसार ही बिल देना होगा। होटल व रेस्टोरेंट के खुलने की अभी संभावना नहीं दिख रही है।
मैरिज गार्डन भी हुए हैं प्रभावित
-लॉकडाउन की वजह से मैरिज गार्डनों में शादिया नहीं हो सकीं। नई गाइड लाइन के अनुसार गार्डनों में शादियां संभव हैं, लेकिन गार्डन संचालकों को बिल भरना पड़ रहा है। ये लोग भी बिजली जलाने लायक ही लोड रखना चाहते हैं। कुछ गार्डन वालों ने स्थायी कनेक्शन भी लिए थे।
– होटल खाली पड़े हैं, इनमें लोगों के रुकने की संभावना भी नहीं दिख रही है। दिसंबर 2020 तक इन्हें व्यापार की उम्मीद नहीं है।
– 10 से 50 किलोवाट का लोड छोटे कॉमर्शियल उपभोक्ता का है। ये सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
1 जून से चेक पेमेंट बंद, ऑनलाइन ही पेमेंट कर सकते हैं
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने 1 जून से चेक से होने वाली पेमेंट व्यवस्था को बंद कर दिया है। बड़े उपभोक्ता ऑनलाइन ही पेमेंट कर सकेंगे या फिर कैश भी जमा कर सकते हैं। चेक से बिल जमा करने में हो रहे फर्जीवाड़े के चलते कंपनी प्रबंधन ने यह फैसला लिया है।
कंपनी प्रबंधन डिवीजनों को वसूली का टारगेट देती है, लेकिन टारगेट को हासिल करने में डिवीजन व जोन बकायेदारों से चेक जमा करा लेते थे, जिससे टारगेट 100 फीसदी पहुंच जाता था। इससे इंजीनियर को शाबाशी मिलती थी, लेकिन बाद में यह चेक बाउंस हो जाते थे, जिससे कंपनी को राजस्व नहीं मिलता था। कंपनी के एमडी ने इस पूरे मामले की जांच कराई तो पूरा फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। इसे ध्यान में रखते हुए कंपनी ने चेक से पेमेंट की व्यवस्था को बंद कर दिया है। इस व्यवस्था के बंद होने से बड़े उपभोक्ताओं को दिक्कत हो सकती है, क्योंकि ये चेक से पेमेंट करते हैं, लेकिन ऑनलाइन का विकल्प खुला है।
इनका कहना है
– एलटी लाइन के कॉमर्शियल उपभोक्ताओं ने लोड कम कराने की अर्जियां डिवीजन स्तर पर दी हैं। ऐसे एक या दो आवेदन रोजाना आ रहे हैं।
विनोद कटारे, महाप्रबंधक सिटी सर्कल
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