ब्रेकिंग न्यूज़:- दिनांक 18/04/2020
देश के मजदूर है भाग्य विधाता
BK NEWS:सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढन “महामारी कोरोना वायरस कोविड -19” संक्रमण से बचाव हेतु “लॉक डाउन” होने के बाद आज 25 वे दिन शासकीय उचित मूल्य खाद्यान्न की दुकान के सामने व आस – पास भारी भीड़ लगी हुई थी तभी जिले के सहायक कलेक्टर – संघ प्रिय (आईएएस) ने भीड़ को देख दुकान का औचक निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिये वहीं आनाज लेने वाले हितग्राहियो को समझाइश देते हुये सामाजिक दूरी बनाकर रखे और कुछ देर में बैढन कोतवाली पुलिस द्वारा देखरेख में खाद्यान्न वितरण संभव हो पा रहा है ।

वही जिलेभर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे – विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, चालक – परिचालक अन्य हितग्राहियो और पूर्व में बनाये गये बीपीएल खाद्यान्न पात्रता पर्ची न होने वाले पात्र हितग्राहियो को खाद्यान्न देने की सूची जिला कलेक्टर के दिशा – निर्देशन में जिला खाद्य आपूर्ति विभाग अधिकारी द्वारा जारी की गयी और दुकानों के बाहर चश्पा किया गया जिसमें कुछ लोगो के सूची में नाम नही है और वही दूसरे प्रदेश और अन्य जिले के साथ- साथ स्थानीय लोग निवास कर रहे लोग छोटे – मोटे कारोबार – कारीगरी – मजदूरी – ठेला हाथ ठेला चलाकर दो जून की रोटी का जुगाड़ करने वाले अब रोटी के लाले पड़े है जो स्थानीय व बाहर के अधिकतर लोगों के पास बीपीएल राशन कार्ड व पात्रता पर्ची न होने के कारण आधार कार्ड से राशन मिलने की आस लगाकर सुबह से शाम तक शासकीय उचित मूल्य के दुकान पास कई दिन से खड़े व भटकते देखे गये और वह कहते है जब तक मेरे पास रुपये पैसे व अनाज रहा तो घर मे रहकर “लॉक डाउन” का पालन कर रहे थे अब असमर्थ है वही 22 से 24 के दिनों के “लॉक डाउन” के बाद अब सरकार व समाजसेवी संगठन कुछ कर सकती है कई जगहों पर जिले के समाजसेवी संगठन सहारा बना हुआ है जैसे जिले में रेडक्रास के साथ – साथ नवजीवन रहवासी कल्याण समिति विन्ध्यनगर सहित अन्य संगठनों द्वारा शहर के आस-पास के अलावा गाँव- गाँव, जंगल – जंगल में जाकर जरूरतमन्दों को राशन पहुचाने का कार्य कर रही है और जरूरतमंद कहते है कि अब किसी प्रकार से राशन मिल जाये तो बच्चों और खुद का भरण पोषण हो सके ।

वही बताते हैं कि मध्यमवर्गीय लोग को कोई पूछने वाला नहीं है जबकि जिले में हाथ ठेला व चना ठेला – फुलकी चाट ठेला – ठेला पल्लेदार सहित अन्य मजदूर टाइप के लोगों को शासन की योजनाओं से बहुत दूर है उन पर अभी तक किसी का ध्यान नही गया है और अब वह लोग दबे आवाज में आप बीति बता रहे है अब किसके पास जाये कोई सुनने वाला नही है ।
वास्तव में जो दिहाड़ी मजदूर है अपने अधिकार को अभी तक पता ही नही था समय निकाल कर श्रम विभाग में अपना नाम नही जुड़वा पाये और किसी के पास आधार कार्ड तक नही और कई लोग नही बनवाये पाये क्योकि प्रतिदिन मजदूरी व रोजमर्रा के काम में व्यस्त रहते थे ।
वही कोविड-19 “लॉक डाउन” चलते परेशान ही नहीं सदमे में हैं समय रहते इनकी खबर नहीं ली गयी तो भूखे लोगो का कोरोना तन्त्र प्रबन्धक जिम्मेदार होगा ।
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