मध्यप्रदेश//सिंगरौली
बढ़ता कारवाँ न्यूज
राघवेन्द्र सिंह गहरवार
BK NEWS//सिंगरौली:- मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में जिला मुख्यालय से महज़ 20 किलोमीटर दूर पर एक गाँव है चितरबई कला लगभग 500 घर हैं जहाँ की आबादी लगभग 5000 हजार के आस पास हैं भारत को वर्ष 1947 में आज़ादी मिली थी जिसके बाद से मध्यप्रदेश प्रदेश समेत सभी राज्यों के गांवों में बिजली पहुँचाने का काम शुरू हुआ था लेकिन किसी कारणवश मध्यप्रदेश के सिंगापुर कहे जाने वाले इस सिंगरौली जिले में जिला मुख्यालय से महज़ आधे घंटे की दूरी पर स्थित इस गाँव पर किसी भी सरकार का ध्यान नहीं गया जिसके कारण आज तक चितरबई कला गांव में घरेलू बिजली का कनेक्शन नही पहुंच पाया जिसके कारण गांव की जनता अंधेरे में जीवनयापन करने पर मजबूर है

गर्मी-जाड़े की मार,बरसता में हाल बेहाल
चितरबई कला के लोगो ने कहा कि हर बदलता मौसम नई परेशानिया लेकर आता है एक तरफ गर्मी की मार से जीना दूभर हो जाता है तो वही दूसरी तरफ ठंड में बच्चे बुढो को कड़ाके की ठंड सताती है वही बरसात के मौसम के बारे में क्या कहा जाए हर वक्त भय बना रहता है कि कही बरसाती जहरीले कीड़े मकोड़े किसी को न काट ले,पांच हजार घनी आबादी वाले इस गांव के लोग आगे कहते हैं कि उन्हें इस बात का भी अफ़सोस है कि वर्षों तक हीटर या कूलर का सुख नहीं भोग सके क्योकि गांव में बिजली महज 24 घंटे में 8 घंटे ही मिल पाता है वो भी सिर्फ सिंचाई के लिए चार – चार घण्टे करके
देश के भविष्य कहे जाने वाले बच्चों के साथ हो रहा अन्याय
कहते हैं बच्चे व युवा आने वाले समय मे देश के भविष्य हैं लेकिन इन भविष्य के साथ बिजली विभाग व चुने हुए जनप्रतिनिधि अन्याय करते नजर आ रहे हैं क्योकि आजदी के बाद घनी आबादी वाले चितरबई कला गांव को कुछ नेताओ के कूटनीति के कारण कृषि क्षेत्र घोषित करवा दिया गया जिसके कारण वहाँ महज चार – चार घंटे करके बिजली सिंचाई के लिए तो दी जा रही है लेकिन घरों का अंधेरा दूर कर उजाला करने के लिए 24 घंटे बिजली आज तक नही मिल पाई जिसके कारण बच्चों की पढाई लिखाई,शादी ब्याह,और भी सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यो में बिजली की कमी खलती दिखाई देती है इसका परिवारों की उत्पादकता,खासकर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई) किसी गांव को ‘बिजली संपन्न’ मान लेता है जब केवल 10 फीसदी घरों, कुछ सार्वजनिक भवनों में बिजली के तार लग चुके हैं। उनमें वास्तव में बिजली आई है या नहीं, या वे बिजली का उपभोग कर रहे हैं या नहीं, इस पर विचार नहीं किया जाता। आधिकारिक रूप से ‘बिजली संपन्न’ किसी गांव के शेष घरों की स्थिति वांछनीय नहीं है।
दीपक तले अंधेरा
किसी ने सही कहा है कि दीपक तले अंधेरा क्योकि जिस सिंगरौली जिले को उर्जाधानी के नाम से जाना जाता है सिंगापुर की उपाधि मिली हो जो सिंगरौली जिला विद्युत की जननी है उसी जिले के लोग उजाले के लिए तरसते दिखाई दे रहे हैं जिस जिले के विद्युत से कई राज्यो के घरो का अंधेरा दूर होता हो उसी जिले के लोग अंधेरे में अपना जीवन जीने के लिए मजबूर हैं अतः ये कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि दीपक तले अंधेरा
नेताओ ने सेकी अपनी चुनावी रोटी,चुनाव बाद नही आती गांव की याद
अगर बात की जाए नेताओ की तो चाहे कोई भी पार्टी हो चुनाव के समय वादो और घोषणाओं की बौछार करने में पीछे नही हटते एक से बढ़कर घोषणाओं की तीर छोड़ते नजर आते हैं यैसा ही सिंगरौली जिले के देवसर विधानसभा व सीधी सिंगरौली लोकसभा के चितरबई गांव की जनता के साथ घटित हुआ जहाँ विधायक से लेकर सांसद तक का चुनाव लड़ने वाले नेता से लेकर जनपद पंचायत से लेकर जिला जनपद पंचायत का चुनाव लड़ने वाले नेता बिजली पानी सड़क का वादा तो कर दिए लेकिन चुनाव बीतने के बाद चुने हुए जनप्रतिनिधियों को एक भी बार चितरबई कला के 5000 हजार जनता की याद इन नेताओं को नही आई वही गांव के लोगो ने बताया कि उनके द्वारा देवसर विधानसभा के भाजपा के पूर्व विधायक स्व. रामचरित्र वर्मा,पूर्व विधायक राजेन्द्र मेश्राम, व वर्तमान विधायक सुभाष वर्मा सभी को कई बार आवेदन देकर घरेलू बिजली आपूर्ति कराए जाने की मांग की गई वही दूसरी बार जीत दर्ज करने वाली भाजपा सांसद रीति पाठक को भी आवेदन देकर गांव के लोगो ने बिजली की गुहार लगाई लेकिन आज तक न तो विधायक ने पहल किया और न तो सांसद ने और यही हाल जनपद और जिला जनपद सदस्य व अध्यक्षो का है उनके भी कान पर आज तक जूं नही रेंगता वही चुनाव के समय सिंगरौली को अपना मायका कहकर वोट लेने वाले सांसद रीति पाठक से जब उनके मायके यानी सिंगरौली जिले के चितरबई कला के लोग बिजली तो दिए लेकिन चुनाव के बाद मायके की याद शायद अब सांसद महोदया को नही आती वही जब जब चितरबई कला में 24 घंटे बिजली के लिए कांग्रेस के मंत्री से बात की गई तो उनके पास भी इनके समाधान करने का कोई उचित जवाब नही था हालांकि हकीकत यही है कि किसी भी राजनीतिक दल के पास इस बात का जवाब नहीं है बिजली पहुँचने में दशक दर दशक क्यो लग रहे हैं
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