
एस0बी0 शर्मा,
निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उ0प्र0
लखनऊ, दिनांक 10 जनवरी 2020
निदेशक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, उ0प्र0 श्री एस0बी0 शर्मा ने बाताया कि आलू, आम, साकभाजी आदि तथा औद्यानिक फसलों को प्रतिकूल मौसम में रोगों एवं व्याधियों से बचाने के लिये किसानों को सजग रहना जरूरी है। उन्होने फसलों को कीटों व अन्य रोगों से बचाव हेतु किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं। श्री शर्मा ने बताया कि वातावरण में तापमान में गिरावट एवं बुंदाबांदी की स्थिति में आलू की फसल पिछेती झूलसा रोग के प्रति अत्यन्त संवेदनशील होती है।
श्री शर्मा ने बताया कि प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है तथा फलस को भारी क्षति पहुॅचती है। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से पत्तियाॅ सिरे से झुलसना प्रारम्भ होती हैं, जो तीव्रगति से फैलती है। पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं तथा पत्तियों के निचली सतह पर 10-20 डिग्री सेन्टीग्रेड तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है और 2 से 4 दिनों के अन्दर ही सम्पूर्ण फसल नष्ट हो जाती है। आलू की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिये जिंक मैगजीन कार्बामेट 2.0 से 2.5 कि0ग्रा0 अथवा मैंकोजेब 2 से 2.5 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 ली0 पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाये तथा माहू कीट के प्रकोप की स्थिति में नियंत्रण के लिये दूसरे छिड़काव में फफूॅदीनाशक के साथ कीट नाशक जैसे-डायमेथोएट 1 ली0 प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। जिन खेतों में पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप हो गया हो तो ऐसी स्थिति में रोकथाम के लिये अन्तःग्राही (सिस्टेमिक) फफॅूदनाशक युक्त रसायन 3 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किसान भाई करें।
आलू, आम एवं साकभाजी फसलों को समसामयिक रोगों एवं व्याधियों से बचाएं
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