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ग्वालियर- -एसडीएम अनिल बनवारिया और तहसीलदार शिवानी पांडेय की अगुवाई में मुक्त कराई गई भूमि का बाजार मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक बताया गया है। कलेक्ट्रेट से दो किलोमीटर दूर मर्सी होम और वन विभाग की जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई हुई। इस कार्रवाई में दोपहर से शाम तक लगभग 6 घंटे में 13 अतिक्रमणकारियों के कब्जे से 110 बीघा जमीन मुक्त कराई है। कार्रवाई के लिए राजस्व और पुलिस का अमला और नगर निगम की जेसीबी सुबह करीब 11 बजे मौके पर पहुंच गई थी।
एंटी माफिया सेल द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच मंगलवार को सिरोल-डोंगरपुर मौजे में मौजूद वन विभाग और मर्सी होम के नाम पर दर्ज जमीन को मुक्त कराने की कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के बाद रमौआ बांध से निकलकर उपनगर मुरार के बीच से बहने वाली मुरार नदी दिखने लगी है। कार्रर्वाई से पहले यह नदी छोटे से नाले के रूप में नजर आ रही थी। नदी के आसपास की 40 बीघा सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटने के बाद अब बहाव क्षेत्र सही हो गया है। जमीन पर कब्जा करने वालों ने नदी के दोनों ओर मिट्टी एक सी करके खेत बना लिए थे और बीच में नाला छोड़ दिया था। कार्रवाई के दौरान इस नाले में मिट्टी भरवा दी गई है और बहाव क्षेत्र को ढलवां करने के बाद अब नदी मेें मौजूद पानी दिखने लगा है। इसी क्षेत्र में हुई दूसरी कार्रवाई में 55 बीघा बीघा जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है। इसके अलावा 15 बीघा जमीन पर आसपास के दबंगों का कब्जा था। कार्रवाई में एसडीएम और तहसीलदार के अलावा आरआई शिवदयाल शर्मा, होतम सिंह यादव, पटवारी अजय राणा, केके वर्मा, रामेन्द्र भदौरिया के अलावा कुलदीप बघेल आदि शासकीय अमले की मौजूदगी में चार जेसीबी से जमीन से फसल नष्ट कराई गई।
शहर में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, एसडीएम अनिल बनवारिया और तहसीलदार शिवानी पांडेय ने कराई कार्रवाई
यहां से हटा कब्जा
सर्वे 207 में रकवा 1.411, सर्वे 209 रकवा 1.139, सर्वे 237 रकवा 0.648, सर्वे 238 रकवा 1.244, सर्वे 239 रकवा 2.518, सर्वे 240 रकवा 3.763, सर्वे 241 रकवा 0.773, सर्वे 247 रकवा 0.261, सर्वे 321 रकवा 0.481, सर्वे 324 रकवा 0.230, सर्वे 360 रकवा 10.052, सर्वे 360/2 रकवा 1.533, सर्वे 361 रकवा 0.052, सर्वे 362 रकवा 0.272, सर्वे 363 रकवा 0.010, सर्वे 367 रकवा 0.230 की जमीन मुक्त कराई गई है।
इनके थे कब्जे
मुरार नदी के आसपास मौजूद इस जमीन पर सिरोल निवासी पप्पू गुर्जर, शेषकरण बघेल, मेघसिंह बघेल, कम्मोद बघेल, राजासिंह, दीनदयाल आदि ने कबज कर लिया था। दूसरी जगह की शासकीय भूमि पर डोंगरपुर निवासी बाबूलाल जाटव, गोरेलाल जाटव और होतमसिंह जाटव, नैनागिर निवासी बेताल सिंह गुर्जर ने कब्जा किया हुआ था।
पुराने दस्तावेजों के आधार पर फर्जीवाड़ा
राजस्व विभाग के सूत्र बताते हैं कि शासकीय भूमि पर मध्य भारत भू राजस्व के अंतर्गत 60 बीघा भूमि अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के नाम पर की गई थी। 1971 में इस भूमि पर दूसरा नाम चढ़ गया। इसके बाद बीते कुछ सालों में इस पर शुरुआती में जिस व्यक्ति के नाम पर भूमि दर्ज हुई थी,उसके वंशजों ने इस भूमि के दस्तावेजों में 60 के आगे एक लिखकर 160 बीघा भूमि पर दावा प्रस्तुत किया था। जमीन के लिए न्यायालय से डिक्री भी मिल गई थी, शासन स्तर पर इसके लिए दो अपील खारिज हुईं, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन की स्थिति को लेकर फाइंडिंग दी थी। खास बात यह है कि दस्तावेजों में हेरफेर की संभावना होने के बाद 2010-2011 में तत्कालीन तहसीलदार ने दावा करने के नाम पर एक साल के लिए पट्टा कर दिया था, लेकिन यह अपने आप समाप्त हो गया था। इसके बाद से इस जमीन पर जिन अल्पसंख्यक समुदाय के दो भाइयों का कब्जा था, उनमें से एक पुलिस कर्मी बताया जा रहा है।
-दस्तावेजों की छानबीन के दौरान डोंगरपुर-सिरोल मौजे में शासकीय भूमि पर कब्जा सामने आया था। इस पर कार्रवाई के लिए सोमवार को ही योजना बनाई गई थी। 110 बीघा भूमि को मुक्त करा लिया गया है।
अनिल बनवारिया, एसडीएम
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