ग्वालियर- ऊप्र मथुरा स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में विराजमान भगवान द्वारिकाधीश की मूर्ति जो ग्वालियर में खुदाई के दौरान निकली थी। यह मूर्ति पहले ग्वालियर में पारखजी का बाड़ा स्थित हवेली वाले द्वारिकाधीश मंदिर में विराजमान थी। लेकिन करीब 151 साल पहले मूर्ति को ऊप्र मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर में स्थापित किया गया। वहीं ग्वालियर में भगवान द्वारिकाधीश की छोटी मूर्ति आज भी विराजमान है। बताया जाता है कि सिंधिया राजवंश के शासक जीवाजीराव सिंधिया और स्थानीय व्यवसायी पारख सेठ को सपना आया था कि द्वारिकाधीश मथुरा ऊप्र में विराजना चाहते हैं।
मंदिर के पुजारी रजनीकांत व्यास बताते हैं कि पारखजी का बाड़ा स्थित हवेली वाले मंदिर में द्वारिकाधीश भगवान की सेवा करने वाली उनकी चौथी पीढ़ी है। उन्होंने बताया कि सिंधिया राजवंश के शासक महाराजा जीवाजीराव सिंधिया को भगवान ने सपना दिया था कि मैं जमीन के अंदर हूं, मुझे बाहर निकालो।
इसके बाद जीवाजीराव सिंधिया और पारख सेठ कम्पू कोठी पहुंचे और उन्होंने वहां पर जमीन की खुदाई करवाई। खुदाई में एक संदूक निकाला, जिसमें भगवान द्वारिकाधीश और हरिहर की मूर्ति थीं। इनमें से द्वारिकाधीश की मूर्ति को दौलतगंज स्थित पारखजी के बाड़ा में स्थापित कराया गया।
इसके बाद पारखजी को भगवान ने फिर से सपना दिया कि मैं मथुरा में जाना चाहता हूं। इसके बाद पारख सेठ ने यह बात महाराज जीवाजीराव सिंधिया को बताई। वह इस मूर्ति को लेकर मथुरा में द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे और वहां पर उन्हें विराजमान किया। इसके बाद ग्वालियर में भगवान द्वारिकाधीश जैसी ही दूसरी लेकिन पहले से छोटी मूर्ति को इसी मंदिर में विराजमान किया गया।
सबसे पहले यह करते थे सेवा
हवेली वाले द्वारिकाधीश मंदिर में सबसे पहले स्व. गोपी वल्लभ भगवान की सेवा करते थे। इसके बाद उनके बेटे मदन मोहन ने भगवान की सेवा की। उनकी मृत्यु के बाद गोपाल व्यास सेवा करते थे। लेकिन उनकी भी उम्र हो गई है इसके कारण अभी उनके बेटे रजनीकांत व्यास मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश की सेवा करते हैं।
काले पत्थर की है भगवान की मूर्ति
ग्वालियर में भगवान द्वारिकाधीश की मूर्ति काले पत्थर से बनी है। भगवान का सुबह श्रृंगार किया जाता है। साथ ही मंदिर में भजन कीर्तन आदि होते हैं। जबकि शाम को भगवान की आरती की जाती है।
कैलाश टॉकीज के पास विराजमान हैं भगवान हरिहर
भगवान हरिहर ग्वालियर में कैलाश टॉकीज के पीछे मंदिर में विराजमान है। ग्वालियर में हरिहार भगवान की एकमात्र मूर्ति है। इसमें एक ही पत्थर में भगवान विष्णु और शिव की मूर्ति है, जिसमें आधा स्वरूप भगवान विष्णु और आधा हिस्सा भगवान शिव का है।
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