ग्वालियर
रोड हादसे में घायल की ड्रिप बदलने को लेकर डॉक्टर व मरीज के अटेंडेंट के बीच विवाद हो गया। विवाद मारपीट में बदल गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने एक अटेंडेंट को सलाखों के पीछे कर दिया और मारपीट में घायल डॉक्टर की ओर से शिकायत दर्ज कर ली। खास बात यह है कि डॉक्टर व मरीजों की सुरक्षा के लिए बनाई गई पुलिस चौकी पर ताला लटका हुआ था। जेएएच की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही यूडीएस कंपनी के सुरक्षा गार्ड मूकदर्शक बनकर विवाद होते देखते रहे। तैनात गार्ड का कहना था कि 6 हजार की नौकरी में विवाद और फिर पुलिस के चक्कर नहीं लगा सकते। इससे साफ है कि जेएएच की सुरक्षा लाखों खर्च करने के बाद भी असुरक्षित है।
यह रहा घटनाक्रम-
करैरा निवासी रवि राय सड़क हादसे में घायल हुआ था। उसके चेहरे पर कट के निशान थे। रवि को लेकर उसके जीजा घनश्याम सुबह 6 बजे ट्रॉमा सेन्टर पहुंचे थे। जहां पर उसकी मरहम पट्टी हुई और टांके लगाने के लिए डॉक्टर ने संबंधित विभाग को सूचित कर दिया, साथ ही एक ड्रिप भी चढ़ा दी। इसके बाद डॉक्टर अन्य गंभीर मरीजों को इलाज देने में लग गए। सुबह 10 बजे जूनियर डॉ विवेक धाकड़ ट्रॉमा में राउंड ले रहे थे। तभी वहां पर रवि का मामा रामगोपाल पहुंचा और ड्रिप खाली होने पर बोतल बदलने के लिए स्टाफ से बोलने लगा। इस पर डॉ विवेक ने उसे शोर न करने की हिदायत देते हुए बोतल बदलवाने के लिए स्टाफ से बोल दिया। पर डॉक्टर की यह बात रामगोपाल को बुरी लगी तो वह हंगामा करने लगा जिस पर स्टाफ की मदद से डॉक्टर ने रामगोपाल को बाहर करवा दिया। इसके थोड़ी देर बाद करीब साढ़े दस बजे रामगोपाल अपने कुछ साथियों के साथ ट्रॉमा पहुंचा और डॉ विवेक को चांटा मार दिया। इसके बाद वहां पर बबाल खड़ा हो गया और इसकी सूचना कंपू पुलिस को दी गई। कंपू पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तब तक रामगोपाल भाग चुका था ।डॉ विवेक की शिकायत पर पुलिस ने रवि के जीजा घनश्याम को पकड़ कर सलाखों के पीछे कर दिया।
पहले डॉक्टरों ने की मारपीट-
पुलिस की कस्टडी में बैठे घनश्याम का कहना है कि ड्रिप बदलने की बोलने पर डॉक्टर ने अभद्रता की। जिस पर रामगोपाल भड़क गया तो उसकी मारपीट कर ट्रॉमा से बाहर कर दिया। मामला शांत हो गया था पर फिर पता नहीं चला कि कब रामगोपाल आया और डॉक्टर से लड़ने लगा। पर वह तो भाग निकला डॉक्टरों ने मिलकर मेरी जमकर मारपीट की और कपड़े तक फाड़ दिए।
आए दिन होता विवाद-
ट्रॉमा व केआरएच में आए दिन अटेंडेंट व डॉक्टरों के बीच विवाद होता है। इस विवाद को रोका जाए, इसके लिए जूनियर डॉक्टरों ने पुलिस तैनात करने की मांग की थी। इस पर चौकी तो बना दी पर फोर्स तैनात नहीं किया। उधर यूडीएस कंपनी के अफसरों का कहना है कि जेएएच सुरक्षा के लिए गार्डों की संख्या बढ़ानी चाहिए।
वर्जन-
डॉक्टरों व मरीजों की सुरक्षा के लिए चौकी तो बनाई पर पुलिस नहीं है। हर दिन दस हजार लोग जेएएच आते हैं कभी न कभी विवाद की स्थिति तो बनेगी उसे रोकने के लिए पुलिस तैनात तो होनी ही चाहिए।
डॉ अशोक मिश्रा, जेएएच अधीक्षक
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