ग्वालियर- हाईकोर्ट मप्र की ग्वालियर बेंच में शासन की ओर से पैरवी कर रहे आधा दर्जन सरकारी वकीलों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इनमें से अधिकांश वकील वे हैं, जिनकी नियुक्ति का यह कहते हुए विरोध किया था कि वे भाजपा से ताल्लुक रखते हैं। कुछ वकीलों को खराब प्रदर्शन के आधार पर हटाया जा सकता है। इसके साथ ही सरकारी वकीलों के जो पद रिक्त हैं, उन्हें भी इस बार भरा जाएगा। पद रिक्त होने के कारण वर्तमान में पैनल अधिवक्ताओं की सेवाएं ली जा रही हैं।
दरअसल, अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी का कार्यकाल आगामी आदेश तक बढ़ा दिया गया है। इस आदेश के बाद से सरकारी वकीलों की सूची को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। सरकारी वकीलों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। वर्तमान में हाईकोर्ट बेंच स्थित महाधिवक्ता कार्यालय में 31 सरकारी वकील कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या 40 है। सरकारी वकील बनने के लिए कई वकील प्रयासरत हैं। इसके लिए उन्होंने स्थानीय मंत्रियों, विधायकों को अपने बाॅयोडेटा थमा दिए हैं। कुछ वकील ऐसे भी हैं, जो विधि एवं विधायी कार्य मंत्री से सिफारिश करवा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार उप-महाधिवक्ता का पद भी भरा जाएगा। वर्तमान में कुबेर बौद्ध बतौर उप-महाधिवक्ता शासन की ओर से पैरवी कर रहे हैं, लेकिन उनकी मूल नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में हैं। उप-महाधिवक्ता के पद पर नियुक्ति होने के बाद ग्वालियर बेंच में दो उप-महाधिवक्ता हो जाएंगे।
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