ग्वालियर-
जबलपुर में 25 हजार करोड़ का बिजली घाटा अब जनता से वसूलने की तैयारी हो रही है। मप्र विद्युत नियामक आयोग के पास इस घाटे की भरपाई को लेकर याचिका दाखिल की गई है। आयोग ने भी याचिका को मंजूर करते हुए सुनवाई की तारीख 11 दिसंबर तय की है। याचिका के खिलाफ आम लोगों से आपत्तियां मांगी गई हैं। यदि उचित आपत्ति नहीं लगी तो इतने बड़े घाटे का बोझ जनता को महंगी बिजली खरीदकर चुकाना पड़ सकता है। इसमें 9 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा सिर्फ राजस्व वसूली का है। ये वो पैसा है जो बिजली कंपनी बिजली बेचने के बाद भी वसूलने में नाकाम रही। मप्र में तीन बिजली वितरण कंपनियां हैं। इसमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी है।
तीनों कंपनियों ने 2014-15 से 2017-18 के बीच हुए बिजली नुकसान का हिसाब-किताब बनाया है, जो करीब 25 हजार करोड़ रुपए हुआ है। बिजली कंपनी को साल 2016-17 में सबसे बड़ा नुकसान बिजली से हुआ था। ये करीब 7247.55 करोड़ रुपए था। बिजली कंपनी चार साल की अलग-अलग याचिका को मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर हर्जाना मांग रही है।
इस घाटे को या तो सरकार दे सकती है या फिर जनता से महंगी बिजली बेचकर वसूला जाएगा। आयोग याचिका पर जनसुनवाई करेगा। 11 दिसंबर को भोपाल में इस पर सुनवाई होगी। इससे पहले लोगों से आयोग ने आपत्तियां मांगी है। यदि उचित कारण नहीं मिले तो आयोग बिजली कंपनी के पक्ष में फैसला कर सकता है। ऐसे में संभव है कि नुकसान की पूर्ण या आंशिक राशि मंजूर की जाए।
इसका असर आम जनता को झेलना पड़ सकता है। हर साल अंतिम हिसाब-किताब बनाया जाता है। इसमें नफा और नुकसान का पता चलता है। बिजली कंपनी के मुताबिक हर साल उसे बिजली खरीदी और राजस्व वसूली में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
ऐसे हुआ नुकसान
साल कुल घाटा बिजली खरीदी राजस्व वसूली अटकी
2014-15 5156.88 3976.88 1393.83
2015-16 7156.94 3549.59 3199.84
2016-17 7247.55 3414.69 2528.79
2017-18 5327.54 2693.66 2296.20
(नोट-राशि करोड़ में)
क्या हो सकता है
– मप्र विद्युत नियामक आयोग घाटे में मांगी गई राशि में कुछ कटौती करने के साथ इसे मंजूरी दे सकता है। इसके आधार पर बिजली कंपनी बिजली की दरों में बदलाव कर इस राशि को वसूलने की तैयारी कर सकती है। बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि इतने बड़े घाटे की भरपाई के लिए संभव है कि 4-5 रुपए प्रति यूनिट बिजली के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।
– बिजली विशेषज्ञों का दावा है कि याचिका को मंजूर ही नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि समय गुजरने के बाद बिजली कंपनी ने घाटे की मांग की है
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal