ग्वालियर-
भिंड न्यायालय विशेष न्यायाधीश एससी- एसटी एक्ट सुनील कुमार श्रीवास्तव द्वारा प्रधान आरक्षक उमेश बाबू की हत्याऊमरी थाना परिसर में के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। घटना ऊमरी थाना परिसर में 9 सितंबर 2018 को घटित हुई थी। पुलिस द्वारा पकड़कर लाए गए आरोपी विष्णु राजावत पुत्र श्यामशरण सिंह द्वारा प्रधान आरक्षक सहित एक अन्य आरक्षक पर हमला कर दिया गया था।
मीडिया सेल प्रभारी इंद्रेश कुमार प्रधान ने बताया पुलिस ग्राम लारौली, थाना रौन निवासी विष्णु राजावत को बाजार में उत्पात मचाने पर पकड़कर लाई थी। घटना शाम करीब साढ़े सात बजे की है। थाना के एचसीएम रूम में आरक्षक मयंक दुबे काम रहे थे तथा वायरलैस सेट पर आरक्षक रामसहाय बैठे हुए थे। प्रधान आरक्षक उमेश बाबू द्वारा पकड़कर लाए गए विष्णु के खिलाफ शांति भंग करने को लेकर लिखा पढ़ी की जा रही थी। तभी उसका दोस्त मान सिंह आया।
दोनों के बीच बातचीत हुई और इसके कुछ देर बाद विष्णु द्वारा कम्प्यूटर कक्ष के सामने बने बरामदा में काम कर रहे उमेश बाबू व पहरे पर तैनात संतरी आरक्षक गजराज सिंह को जान से मारने की नियत से गैंती से हमला कर दिया गया था। दोनों गिर पड़े। इसी बार आरक्षक मयंक और रामसहाय भागकर बाहर आए और चिल्लाते हुए बाहर निकले और रायफल लेकर आरोपी के पीछे भागे लेकिन आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गया। उमेश बाबू व गजराज को अस्पताल लाया गया। इसके बाद उमेश बाबू की मौत हो गई।
आरोपी विष्णु को हत्या के मामले में दोषी पाते हुये आजीवन कारावास एवं पांच हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। आरोपी मान सिंह के विरूद्ध अपराध प्रमाणित न होने से उसे दोष मुक्त किया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रवीण दीक्षित द्वारा पैरवी की गई। राज्य शासन द्वारा इसे जघन्य एवं सनसनी खेज मामलों में शामिल किया गया।
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