ग्वालियर-
मुरैना अंचल में बटेश्वरा मंदिरों को दोबारा से खड़े करने वाले मध्यप्रदेश के तत्कलीन ऑर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के निदेशक केके मोहम्मद ने पत्रकार से बातचीत में कहा कि उन्होंने 1976-77 में एएसआई के डायरेक्टर रहे आरबी लाल के साथ अयोध्या में विवादित क्षेत्र में खुदाई की थी। 1990 में मैंने कहा था कि जमीन में मंदिर के अवशेष मिले हैं। यह खुदाई सरकार के निर्देश पर की गई थी। यहां बता दें कि 11वीं सदी के बटेश्वरा मंदिर 2005 से पहले जमींदोज हालत में थे। केके मोहम्मद ने बताया कि जब वे मध्यप्रदेश में एएसआई के निदेशक बनकर आए तो शिव उनके सपने में आए थे और बटेश्वरा के मंदिरों के बारे में इंगित किया था। 2005 में उन्होंने किसी तरह बटेश्वरा क्षेत्र को तलाश किया और खुदाई कराई तब शिव मंदिर मिले।
रिपोर्ट धर्म के आधार पर नहीं बनती : केके मोहम्मद ने बताया कि एएसआई के आर्कियोलाजिस्ट अपनी रिपोर्ट किसी धर्म के आधार पर नहीं बनाते। बल्कि जमीन के अंदर जो मिलता है, उसी के आधार पर बनाते हैं। 1990 में मैंने कह दिया था विवादित स्थल के नीचे मंदिर था। इस बात को 2003 में खुदाई करने वाली डॉ. आर मणि की टीम ने भी प्रमाणित किया। डॉ. मणि की टीम में भी तीन आर्कियोलॉजिस्ट मुस्लिम थे।
श्री मोहम्मद 2014 में रिटायर हो गए और अब वे केरल के कालीकट में निवास कर रहे हैं। अभी भी वे बटेश्वरा के मंदिरों सहित अन्य पुरा अवशेषों पर काम शुरू कराने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
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