डबरा
डबरा व भितरवार में 48 मैदानी अधिकारी व कर्मचारीअच्छा उत्पादन और फसलों को कीट व्याधियों से बचाने के लिए किसानों को सलाह देने यूं तो तैनात है। लेकिन इनकी उदासीनता के चलते दोनों ही क्षेत्र में खेतों में खड़ी धान की फसल कंडवा रोग की चपेट में आ गई। जिससे करीब चालीस से पचास फीसदी तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे अब किसानों की लागत भी निकल पाना मुश्किल है। ऐसे में किसान अधिकारियों से फसल में हुए नुकसान का सर्वे कराए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
धान का कटोरा कहे जाने वाले डबरा व भितरवार क्षेत्र में इस साल करीब 60 हजार हेक्टेयर में धान की रोपनी की गई। लेकिन समय रहते उपचार नहीं मिलने के कारण क्रांति व बासमती वैरायटी की सुगंधा धान की फसल कंडवा रोग की चपेट में आ गई। रोग के कारण धान के उत्पादन पर पचास फीसदी तक असर पड़ा है। कुल मिलाकर उत्पादन आधा ही रह गया है।
कंडवा रोग लगने से काली पड़ चुकी हैं धान की बालियां
भितरवार क्षेत्र में धान की फसल में लगे कंडवा रोग से काली पड़ी फसल।
48 मैदानी अधिकारी-कर्मचारी, गांवों में नहीं जाते
फसलों की बुवाई से लेकर उनका उत्पादन होने तक की जिम्मेदारी कृषि विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों की रहती है। नियमानुसान अधिकारियों व कर्मचारियों को गांव-गांव जाकर किसानों को सही तरह से बोवनी किए जाने व कौन सा खाद बीज अपनाया जाए इसको लेकर जागरूक करना चाहिए। इसके अलावा फसलों में रोग न लगे इसके लिए नियमित भ्रमण किया जाना चाहिए। यदि कोई रोग लगता है तो उसका समय रहते उपचार कराया जाना चाहिए। लेकिन डबरा व भितरवार में तैनात मैदानी अमले के अधिकारी कर्मचारी ऑफिस में ही बैठे रहते हैं गांवों का भ्रमण तक नहीं करते हैं। यही कारण रहा कि पूरे क्षेत्र में धान की फसल कंडवा रोग की चपेट में आग गई और पचास फीसदी तक उत्पादन घट गया। यदि समय रहते अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो नुकसान नहीं होता। धान की फसल में लगे रोग का असर कृषि उपज मंडी में भी देखने को मिल रहा है। इस बार मंडी में अंचल की धान की फसल की आवक विगत वर्ष की तुलना में कम देखने को मिल रही है। मंडी में दतिया, गवालियर सहित अन्य दूसरे जगहों से ट्रॉलियां अधिक आ रही हैं। अंचल के किसानों की फसल रोग के कारण काली दिखाई दे रही हैं जिससे व्यापारी भी भाव कम लगा रहे हैं।
क्या है धान का कंडवा रोग
धान की फसल में कंडवा रोग लग चुका है। फफूंद जैसे होने वाले इस रोग में बालियों में दाने के जगह काला चूर्ण या पाउडर बन जाता है। यह रोग हवा के साथ एक खेत से दूसरे खेत में फैलता है। इसका सबसे ज्यादा असर हाइब्रिड बीज वाले धानों पर पड़ता है। दीपावली के पहले हुई बारिश और उसके बाद आसमान में बादल छाए रहने के कारण ही फफूंद के कारण बालियों में काले रंग का धब्बा लगना शुरू हो गया था। कंडवा रोग काफी तेजी से फैलता है।
फफूंद नियंत्रण वाली दवा इस्तेमाल करनी चाहिए
 कंडवा रोग का असर दिखते ही रोग के शुरुआती चरण में फफूंद नियंत्रण वाली दवाइयों का इस्तेमाल करना चाहिए।  चंद्रभान जाटव, प्रभारी, कृषि अनुसंधान केंद्र भितरवार
सर्वे के लिए चर्चा कर रहे हैं
 धान की फसल में कंडवा रोग बारिश और बादलों के छाए रहने के कारण आया है। बाद में यह इतनी तेजी से फैला कि नियंत्रण करना मुश्किल हो गया। सर्वे के लिए हम वरिष्ठ अिधकारियों से चर्चा कर रहे हंै।  वीकेे मिश्रा, एसएडीओ, डबरा
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