ग्वालियर
देश में वित्तीय अनियमितता के मामलों की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंस्पेक्टर को श्योपुर में राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने रिश्वत के लिए चार महीने तक परेशान कर डाला। ईडी इंस्पेक्टर ने सभी दस्तावेजों के साथ अपनी जमीन के नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया तो तहसीलदार ने निरस्त कर दिया। दलाल के मार्फत 5 हजार रुपए की डिमांड हुई, पर जब बात शुरू हुई और पता चला कि कि आवेदन ईडी इंस्पेक्टर का है तो तत्काल निरस्त हुए ऑनलाइन आवेदन पर ऑफलाइन नामांतरण कर दिया।
श्योपुर तहसील के वनवाड़ा गांव निवासी भोलाराम जाट बैंगलुरू में ईडी इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने श्योपुर बायपास की मधुवन नगर कॉलोनी में एक प्लॉट लिया, जिसकी रजिस्ट्री के बाद मार्च महीने में नामांतरण के लिए लोकसेवा केन्द्र के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया। लोकसेवा केन्द्र पर दस्तावेज पूरे होने पर ही आवेदन लिया जाता है और उसके बाद 40 दिन में नामांतरण हो जाना चाहिए, लेकिन पटवारी की टीप न होने का हवाला देकर तहसीलदार ने आवेदन निरस्त कर दिया। चार महीने तक ईडी इंस्पेक्टर परेशान होता रहा। बाद में जिस दलाल ने ईडी इंस्पेक्टर को प्लॉट दिलावाया था उसने 5000 की रिश्वत देकर नामांतरण की बात कही।
नोट : ईडी इंस्पेक्टर और दलाल शंभूदयाल सोनी के बीच हुई बातचीत के कुछ अंश हैं।
हम अफसरों के दलाल हैं लाखों देते हैं
ईडी इंस्पेक्टर : आप क्या चाह रहे हैं कि मैं नामांतरण के एवज में 5000 दे दूं।
दलाल : पटवारी हमसे भी पैसे लेता है। फ्री में थोड़े करता है काम। हम तो पैसे में काम कराते हैं।
ईडी इंस्पेक्टर : जब कागजात पूरे हैं तो आवेदन क्यों रिजेक्ट हुआ ?
दलाल : कितने भी प्रोसेस पूरे कर लो, तब भी यह कमी निकाल देते हैं, मेरे खुद के नामांतरण के पटवारी ने 4 हजार मांगे हैं।
ईडी इंस्पेक्टर : पटवारी पैसे की बात करे तो करवा देना, मैं तैयार हूं।
दलाल : आपसे पैसे की बात थोड़ी करेगा, आपको तो कानून बताएंगे। पूरी व्यवस्था बनी हुई है। पैसे लेकर देने का काम तो हम करते हैं।
नोट : ईडी इस्पेक्टर भोलाराम जाट व पटवारी पुरुषोत्तम राठौर के बीच बातचीत
तहसीलदार के कहने पर रिजेक्ट किया : पटवारी
ईडी इंस्पेक्टर : मैंने पूरे कागज के साथ आवेदन किया, फिर कैसे निरस्त हुआ।
पटवारी : निरस्त मैंने नहीं तहसीलदार ने किया।
ईडी इंस्पेक्टर : आप क्यों तहसीलदार के कहने पर गलत काम करते हैं?
पटवारी : हम पर क्यों आएगी? तहसीलदार बिना पटवारी की रिपोर्ट में नामांतरण कर रहा है। आपकी ही कॉलोनी में 5 नामांतरण हुए है, जिनमें पटवारी की कोई रिपोर्ट नहीं लगी।
ईडी इंस्पेक्टर : मुझसे दलाल ने 5000 मांगे और कहा 15 दिन में नामांतरण घर आ जाएगा।
पटवारी : मैंने तो आपसे पैसे नहीं मांगे। लोग तो कुछ भी कहते रहें, लोगों का क्या है। आपका तो दो महीने का है लोगों के 4-4 साल पुराने नामांतरण नहीं हुए। पूरा सिस्टम गड़बड़ है। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं, ना हीं मैं सुधार सकता हूं।
इनका कहना है
आज ही राजस्व विभाग के आला अफसरों से बात करता हूं
अगर ऐसा हुआ है तो सच में गंभीर मामला है, श्योपुर में आला अफसर क्या कर रहे हैं, मैं इसे लेकर आज ही राजस्व विभाग के आला अफसरों से बात करता हूं। ऐसा फिर किसी के साथ न हो ऐसी व्यवस्था बनवाई जाएगी। – गोविंद सिंह राजपूत, राजस्व मंत्री, मप्र
यह मामला मेरी पदस्थी से पहले का है। उस समय के तहसीलदार ओपी राजपूत से ईडी इंस्पेक्टर की बहस भी हुई थी। अब तो नामांतरण हो चुका है, इसलिए छोड़िए इस मामले को। – भरत नायक, तहसीलदार, श्योपुर
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