
बलिया: फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रशासन व कृषि महकमा पूरी अलर्ट है। इसके लिए एक सेल का भी गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष अपर जिलाधिकारी (वित्त एंव राजस्व) होंगे। सेल के सदस्य के रूप में अपर पुलिस अधीक्षक, समस्त उप जिलाधिकारी व पुलिस क्षेत्राधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी रहेंगे। इसके अलावा समस्त तहसील स्तर पर बनी सेल में उपजिलाधिकारी अध्यक्ष और सीओ व सहायक विकास अधिकारी(कृषि) सदस्य के रूप में होंगे। प्रत्येक गांव के प्रधान एंव क्षेत्रीय लेखपाल को यह निर्देशित किया गया है कि किसी भी दशा में अपने क्षेत्र में पराली/कृषि अपशिष्ट न जलाने दिया जाय। ऐसा कोई करे तो क्षतिपूर्ति की वसूली और दोबारा जलाने की शिकायत सही मिलने पर अर्थदण्ड की कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए। अब कृषि अपशिष्ट जलाने की धटना प्रकाश में आने पर सम्बन्धित लेखपाल भी जिम्मेदार होंगे। उप कृषि निदेशक इंद्राज ने किसानों से अपील की है कि फसल अपशिष्ट जलाने की बजाय वैकल्पिक उपयोग जैसे वायो एनर्जी, कम्पोष्ट खाद आदि का प्रयोग करें।
*इस प्रकार होगी कार्रवाई*
कृषि अपशिष्ट जलाने वाले दोषी व्यक्ति के विरूद्व पर्यावणीय क्षतिपूर्ति व अर्थदण्ड वसूले जाने के सम्बन्ध में स्पष्ट निर्देश है कि लेखपाल आवश्यक साक्ष्यों सहित नायब तहसीलदार/तहसीलदार को तीन दिन में सूचित करेंगे। नायब तहसीलदार/तहसीलदार तीन दिन के अन्दर कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे। इसके बाद सुनवाई होगी और दोषी पर पर्यावरणीय अर्थदण्ड की कार्रवाई होगी।
फसल अपशिष्टों जलाने पर दो एकड तक के किसान को 2500 रुपये प्रति घटना, दो से पांच एकड़ तक के किसान को 5 000 प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक जमीन वाले किसान पर 15000 रुपये प्रति घटना का जुर्माना लगाया जाएगा।
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