ग्वालियर –
श्योपुर कृषि उपज मंडी श्योपुर में व्यापारियों द्वारा किसानों को नकद भुगतान नहीं देने और उड़द की बोली नहीं लगाने से नाराज किसानों ने मंडी में हंगामा कर दिया। हंगामा बढ़ता देख व्यापारियों ने बोली लगाना बंद कर दिया। बोली बंद होने से किसानों ने मंडी कार्यालय का घेराव कर दिया, जिसके बाद मंडी कर्मचारियों ने बचने के लिए खुद को ताले में बंद कर लिया।
सुबह 10 बजे मंडी में व्यापारियों ने बोली लगाना शुरू किया। कुछ ट्रॉलियों की बोली लगाने के बाद व्यापारियों ने नकद भुगतान नही करते हुए आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान करने की बात कही।
किसान नगद भुगतान लेने की बात पर अड़े रहे। जब बात मंडी सचिव के पास पहुंची तो उन्होंने व्यापारियों व किसानों को समझाइश दी। मंडी सचिव की समझाइश के बाद व्यापारी नकद भुगतान करने के लिए तैयार हो गए, लेकिन विवाद यही नहीं थमा व्यापारियों द्वारा उड़द की फसल नहीं खरीदने की बात को लेकर किसानों ने हंगामा कर दिया।
किसान बोले कि अगर व्यापारियों ने उड़द की फसल नहीं खरीदी तो हम दूसरी उपज की भी बोली नहीं लगने देंगे। गुस्साए किसान मंडी सचिव के पास गए। किसानों के गुस्से को देखकर मंडी कर्मचारियों ने कार्यालय के मैन गेट का अंदर से ताला बंद कर दिया। मंडी सचिव और किसानों के बीच गेट के बाहर से बातचीत के बाद कर्मचारियों ने ताला खोला।
मंडी सचिव ने बोली स्थल पर जाकर किसानों व व्यापारियों से बातचीत की, तब जाकर करीब 2:30 बजे खरीदी चालू हो सकी। किसानों के हंगामे की जानकारी मिलने के बाद किसान संगठन के हरिशंकर पालीवाल व रामप्रसाद पारेता मंडी पंहुचे जहां उन्होंने किसानों की तरफ से मंडी सचिव से बात की। विवाद के चलते दिन भर में 20 ट्रॉलियों भी नहीं तुल पार्इं। मंडी बंद होने तक उड़द की फसल बोली नहीं लग सकी।
इनका कहना है
नकद भुगतान की कोई समस्या नहीं है, व्यापारी 2 लाख रुपए तक नगद भुगतान करने के तैयार हैं, लेकिन किसान और व्यापारियों के बीच जो विवाद हो रहा है वह उड़द की उपज को लेकर है। उड़द की क्वालिटी के हिसाब से व्यापारी बोली लगाते हैं तो किसान इस दाम बेचने को तैयार नहीं होते और हंगामा करते हैं। दोपहर को हमने किसानों और व्यापारियों को समझाकर बोली चालू करवा दी है।
शिवप्रताप सिंह सिकरवार सचिव, कृषि उपज मंडी मंडी समिति श्योपुर
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