बिना एप्रिन व नेम प्लेट के बैठी थी डॉक्टर, महिला ने मोबाइल से रिकार्डिंग कर नाम पूछा तो हुआ विवाद
ग्वालियर

जयारोग्य अस्पताल के ट्रामा सेंटर मेंरात 9 बजे महिला अटेण्डेंट एवं चिकित्सक के बीच विवाद हो गया। महिला का आरोप है कि जब वह अपनी बेटी को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लेकर पहुंची तो महिला चिकित्सक ने बाहर से दवाई खरीदने की कहकर पर्चा थमां दिया। जब डॉक्टर से कहा कि सरकारी अस्पताल है तो दवाई बाहर से क्यों खरीदें तो चिकित्सक बिफर गई। मोबाइल से रिकार्डिंग करते समय जब डॉक्टर का नाम पूछा तो हाथापाई की गई और बंधक बना लिया। वहीं महिला चिकित्सक का कहना है कि महिला जबरिया दवा लिखवाने का प्रयास कर रही थी, मना किया तो गला पकड़ लिया। हंगामे की सूचना मिलते ही कंपू थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।
मुरार त्यागी नगर निवासी बबीता शर्मा पति रघुवीर शर्मा अपनी बेटी नंदनी के साथ बाड़े जा रही थी। इसी बीच दौलतगंज में एक्सीडेंट हो गया। बबीता ने बताया कि वह पुलिस के साथ बेटी को इलाज के लिए ट्रामा सेंटर लेकर पहुंची थी। एक्सरे के बाद जब महिला चिकित्सक डॉ निधि आर्य के पास गई तो उन्होंने कहा कि कोई खास चोट नहीं है। यह दवाई लिख रहे हैं जो बाहर से खरीद लेना। हमने कहा कि सरकारी अस्पताल है तो दवाई यहीं से मिलना चाहिए, बाहर से क्यों खरीदें। इस पर डॉक्टर ने कहा कि दवाई नहीं मिलेगी आपको बाहर से ही लेना पड़ेगी। जब हमने मोबाइल निकालकर रिकार्डिंग शुरू की तो डॉक्टर ने विरोध किया, हमने नाम पूछा तो बताने से इंकार करते हुए मोबाइल छिनने का प्रयास किया। साथ ही हमारे साथ मारपीट करने के बाद बंधक बना लिया गया। हंगामे की सूचना मिलने पर जब कंपू पुलिस पहुंची तब हमें छोड़ा गया है। पुलिस ने समझाबुझाकर हंगामा शांत कराया और एमएलसी कराने की कहकर फिलहाल थाने ले गई है।
जबरिया लिखवा रही थी दवाईः
डॉक्टरों का कहना है कि महिला पहले तो एफआईआर के लिए बाहर पुलिसकर्मियों से लड़ रही थी। जब अंदर आई तो जांच में उसके कोई चोट नहीं पाई गई। डॉक्टर ने कहा कि नंदनी को कोई दवाई की जरूरत नहीं है, वह बिल्कुल सही है। फिर भी महिला दवाई के लिए दबाव बना रही थी। समझाने का प्रयास किया तो लड़ने पर उतर आई और महिला चिकित्सक का गला पकड़ लिया। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला को घेरकर एक जगह बैठा लिया और पुलिस आने तक केवल उसे वहां पर रोके रखा।
नेम प्लेट होती तो नहीं बढ़ता मामलाः डीन-अधीक्षक के कई बार निर्देश देने के बाद भी डॉक्टर एप्रिन नहीं पहन रहे और नेम प्लेट भी नहीं लगा रहे हैं। बबीता शर्मा का कहना है कि वह सीएम हेल्प लाइन में शिकायत करने के लिए महिला डॉक्टर का नाम जानना चाहती थी। यदि नेम प्लेट लगी होती तो शायद हाथापाई की नौबत नहीं आती। महिला ने डॉक्टर का नाम पता चलने के बाद सीएम हेल्प लाइन में शिकायत दर्ज करा दी है।
डॉक्टरों पर हमला किसी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ अशोक मिश्रा, अधीक्षक जेएएच
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