ग्वालियर
डबरासिविल न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा वाहन चैकिंग अभियान चलाया। दो प्वांइट पर चार जजों द्वारा चलाए गए इस चैकिंग अभियान के दौरान न्यायाधीशों ने नियमों का पालन न करने वाले दो पहिया वाहन, स्कूल बस, सवारी बस और ई-रिक्शा को रोककर उनके दस्तावेज जांचने के बाद चालन काटने की कार्रवाई की। दोनों प्वांइट पर चलाए गए अभियान में कुल 34 वाहनों के चालान काटे गए, जिनमें से 20 वाहनों से 99500 रुपए का मौके पर ही जुर्माना वसूला गया।

हेलमेट, वाहन पर नंबर नहीं होने और ओवरलोड सवारी होने पर काटा चालान, वसूले 99500 रूपए
स्कूल संचालकों के कारण बच्चों को निजी वाहनों से छोड़ने पहुंचे अभिभावक
न्यायाधीश पारस जैन और न्यायाधीश मनोज गोयल द्वारा अंबेडकर चौराहे पर चेंकिंग अभियान चलाया। इनके द्वारा यहां वाहनों पर नंबर, चालकों पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण ई-रिक्शा, दो पहिया वाहन चालकों पर तीन सवारियां बैठे होने रजिस्ट्रेशन न होने, नंबर प्लेट न होने और नाबालिग द्वारा वाहन चलाने, बस में ओवरलोड सवारियां भरी होने के कारण उनके वाहनों के चालन काटने की कार्रवाई की गई। कुल 29 वाहनों के चालान काटे गए,जिनमें से मौके पर 89500 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं अरू तिराहे पर न्यायाधीश राजीव राव गौतम, और न्यायाधीश निधि मोदिता पिंटो द्वारा 5 वाहनों के चालन काट कर मौके पर एक वाहन से 10 हजार रुपए का जुर्माना वसूला। कार्रवाई के दौरान कई वाहन चालक बहाने बनाते नजर आए, लेकिन न्यायाधीशों ने चालान काटने की कार्रवाई की। इस दौरान सिटी थाने के टीआई यशवंत गोयल, देहात थाने के आरपी इंदौरिया, एसआई राजकुमारी, एडीपीओ नरेंद्र आदि मौजूद थे।
सोचा भाग जाऊंगा, पर पकड़ा गया…
बाइक लेकर भागने लगा
कार्रवाई के दौरान एक बाइक पुलिसकर्मियों ने पकड़ कर जब्त की। लेकिन उस बाइक को चालक दूसरी चाबी लगाकर ले जाने की कोशिश करने लगा। जब पुलिसकर्मियों ने देखा तो वह मौके से भाग गया। जिस पर पुलिसकर्मियों ने बाइक से पीछा कर कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया। उसका चालान भी काटा गया और बाइक लेकर भागने की कोशिश पर पुलिस की जमकर डांट खानी पड़ी।
हेलमेट था, पर लगाया नहीं
कार्रवाई के दौरान एक एक्टिवा को पकड़ा गया तो जजों ने उसके हेलमेट न होने पर जुर्माने की बात कही, जिस पर उसने कहा हेलमेट है, तो जजों ने कहा कि लगाया क्यों नहीं। कई बार वह जजों से बहस करने लगा तो पुलिसकर्मियों ने उसे फटकार लगाई और उसके खिलाफ चालान काटने की कार्रवाई की।
बाइक पर सवार थे 3 लोग काटा 3 हजार का चालान
कार्रवाई के दौरान एक बाइक पर तीन लोग बैठे हुए थे। जब उस बाइक को पकड़ा तो उस बाइक को दिलीप बलवानी चला रहा था, जबकि उसका रजिस्ट्रेशन हेमंत सिहारे के नाम से था। जब जजों ने जुर्माना भरने के लिए कहा तो पहले वह कम करने के लिए कहने लगा, यह बात उसने जजों से बार-बार कही तो जजों ने फटकार लगाई की मोलभाव न करें। जिस पर वह जुर्माना भरने के लिए तैयार हो गया,उसका तीन हजार रुपए का चालान काटा गया और तीन माह के लिए रजिस्ट्रेशन सस्पेंड करने की कार्रवाई की बात कही। इसी तरह के बहाने अन्य वाहन चालकों ने भी बनाए। हालांकि खुली कोर्ट के चलते किसी की भी सुनवाई नहीं हो सकी। वह और बात है कि कई लोग इस अवसर पर नजर बचाकर भी भागने में सफल रहे।
जब महिलाओं ने की सिफारिश…
कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं ने भी हेलमेट न पहनने वालों की सिफारिश की।
नहीं निकली स्कूल बसें बच्चे निजी वाहन से पहुंचे
अरू तिराहे पर जज राजीव राव गौतम और जज निधि मुदिता पिंटो द्वारा चैकिंग अभियान चलाया। सुबह 7 बजे से तीन घंटे से अधिक समय तक चैकिंग अभियान चलाया। कार्रवाई के सूचना उस रोड पर मौजूद स्कूलों को लग गई थी,जिससे कार्रवाई के स्कूल की बसें वहां से नहीं निकली,जिससे अभिभावक परेशान रहे और अपने बच्चों को निजी वाहनों से स्कूल छोड़ने और वापस लेने गए। कई सारे बच्चों को उनके माता-पिता जरूरी काम छोड़कर स्कूल से जाने और ले जाने को मजबूर हुए। जबकि अगर स्कूल बसें नियम के पालन में होती तो शायद यह स्थिति बनती ही नहीं। अपनी कमी को छुपाने के लिए स्कूल संचालकों ने अपनी बसों से बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने का काम नहीं किया। हालांकि इस सबके बाद भी फिलहाल अभिभावक अपनी मजबूरी और स्कूल संचालकों की शिकायत के लिए सामने नहीं आते हैं।
ओवरलोड थी सवारी बस थाने भिजवाई सवारी
कार्रवाई के दौरान वहां से सवारी बस निकली, जब बस को रोककर उसकी चैकिंग की गई तो उसमें ओवरलोड सवारियां थीं, साथ ही परमिट, फिटनेस और दस्तावेज भी पूरे नहीं थे। जिसके चलते सवारियां उतरवाकर उसे जब्त कर थाने भिजवा दिया गया। जिसके चलते सवारियां बस का इंतजार करती रहीं,लेकिन कार्रवाई की सूचना मिलते ही करीब 2 घंटे तक वहां से अन्य कोई सवारी वाहन नहीं निकला। कई लोग श्राद्ध पक्ष के चलते बस में सवार थे जो बस के अचानक बीच में ही पकड़े हो जाने से परेशान हुए। लोगों ने बताया कि इस तरह का वाक्या पहली बार नहीं हुआ है। अगर बस संचालक नियमों का पालन करें तो शायद हमें ऐसे परेशान न होना पड़ा हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को इस तरह की कार्रवाई अधिक समय का गेप देकर नहीं बल्कि जल्द से जल्द करना चाहिए।
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