ग्वालियर -ग्वालियरदेश में एक खास पहचान रखता हैपर्यटन और धरोहर की दृष्टि से ग्वालियर देश में एक खास पहचान रखता। यह इसलिए भी है कि यहां 11 से अधिक शैली की धरोहर देखी जा सकती हैं। इनमें हिंदु आर्किटेक्चर, इंडो इस्लामिक, ब्रिटिश, इटालियन, रोमन, फ्रेंच, परशियन, जैन आर्किटेक्चर और नागर शैली के ऐतिहासिक मंदिर देखे जा सकते हैं। 15वीं शताब्दी में यहां प्योर हिंदू आर्किटेक्चर शैली के मानसिंह पैलेस और गूजरी महल का निर्माण हुआ। वहीं 16वीं शताब्दी में मुगलों के शासनकाल में ग्वालियर फोर्ट पर जहांगीर और शाहजहां महल का निर्माण कराया गया। यह शैली इंडो-इस्लामिक है। 1707 के बाद अंग्रेजों के शासनकाल में विक्टोरिया कॉलेज (अब एमएलबी कॉलेज) और फिर 19वीं शताब्दी में सिंधिया स्टेट के समय महाराज बाड़ा पर 7 शैली के भवनों का निर्माण हुआ। यही वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं। वर्ष 2018 में 2,76,607 देशी पर्यटक आए। वहीं 10, 448 से ज्यादा विदेशी पर्यटक ग्वालियर आए। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक शहर आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या सितंबर के बाद बढ़ती है। 3 वर्षों में यहां आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ रही है।
आईआईटीटीएम के डॉ.चंद्रशेखर बरुआ ने
पाठकों के लिए लिखी यहां की खूबी
इसलिए आते हैं पर्यटक शहर में अधिकांश पर्यटक मितावली, पड़ावली, बटेश्वर देखने के लिए यहां आते हैं
ये विरासत दिलाती हैं हेरिटेज सिटी का दर्जा
महाराज बाड़े की 7 शैलियां
पहली बार देखिए 3600 में मितावली के चौंसठ योगिनी शिव मंदिर।
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal