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यहां है लंका दहन में हनुमान जी की मदद करने वाले शनिदेव का मंदिर, लाखों की संख्या में आते है भक्त

 

ग्वालियर- श्रीराम और रावण युद्ध के दौरान लंका दहन में हनुमानजी विजय दिलाने वाले शनिदेव का प्रचीन मंदिर मध्यप्रदेश के मुरैना में ऐंती पर्वत स्थित है। इस मंदिर में शनिदेव विराजमान हैं। न्याय के देवता कहे जाने वाले शनिदेव के मंदिर में उनके सामने ही हनुमानजी की भी प्रतिमा स्थापित है। यह दुर्लभ संयोग विश्व के किसी दूसरे मंदिर में नहीं है। शनिदेव और हुनुमानजी आपस में परम मित्र हैं। यही वजह है कि हनुमानजी की शनिवार को सच्चे मन से पूजा पर शनिदेव की कृपा भी मिलती है। ऐंती के शनि मंदिर में हनुमानजी की यह प्रतिमा महाराजा विक्रमादित्य ने स्थापित कराई थी।

रात से श्रद्धालुओं का आना होगा शुरू, प्रशासन की तैयारियां पूरी

प्रत्येक शनिवारी अमावस को यहां तीन दिवसीय विशाल मेला भरता है जिसमें लाखों श्रद्धालु न्याय के देवता शनिदेव के दर्शन और पूजा कर कष्ट निवारण की कामना करते हैं। आज शनि अमवस्या है ऐसे में लाखों की संख्या में भक्त यहां शनिदेव के दर्शन करने के लिए आते हैं। मंदिर के पुजारी बृजभूषण दास ने बताया कि विश्व का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां शनिदेव की मूल प्रतिमा है। जहां मंदिर में हनुमानजी भी विराजे हैं। शनिवारी अमावस पर सर्वपितृमोक्ष अमावस्या होने से भीड़ अधिक होने की उम्मीद है।

ऐसे आए शनिदेव ऐंती
सीता माता की खोज में गए हनुमानजी को राक्षसों ने बंदी बना लिया और रावण के समक्ष के समक्ष उनकी पूंछ में आग लगा दी। हनुमानजी ने इसी से लंका दहन का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। तब योग साधना से इसका कारण पता किया तो उनके प्रिय सखा शनिदेव लंकाधिपति के पैरों में आसन बने दिखे। तब हनुमान जी ने शनिदेव को अपने बुद्धि चातुर्य से रावण की कैद से मुक्त कराया और तुरंत लंका छोडऩे को कहा। लेकिन शनिदेव ऐसा नहीं कर पाए तब शनिदेव ने हनुमान से कहा कि वर्षों से रावण के पैरों में पड़े रहने से वे दुर्बल हो गए हैं। तुरंत लंका नहीं छोड़ सकते। इस पर हनुमानजी उन्हें पूरे वेग से भारत भूखंड की ओर शनिदेव के आग्रह पर फेंका। तब शनिदेव को भारत की ओर फेंका तो ऐंती पर्वत पर आकर गिरे। यहीं शनिदेव ने अपनी खोई हुई सिद्धियां प्राप्त कीं। बाद में राजा विक्रमादित्य ने यहां शनिदेव का मंदिर बनवाया और प्रतिमा स्थापित कराई। पुरातत्व विभाग इसकी पुष्टि कर चुका है। विक्रमादित्य ने ही शनि प्रतिमा के ठीक सामने हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करवाई

मुरैना में शनिदेव के दर्शन करने आते है लाखों भक्त
मुरैना में शनिदेव के दर्शन करने के लिए शुक्रवार से ही देश भर से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया है। यह मेला रविवार तक चलेगा। अनुमानत: करीब चार लाख श्रद्धालु यहां पर आने की उम्मीद है। इसके लिए प्रशासन ने मेला सेक्टर को कई जोन में बांटकर तैयारियां की हैं। इसके लिए दुकानदार तो गुरुवार को ही दोपहर से आना शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात सहित देश भर से लोग दर्शन और पूजा करने आएंगे। शुक्रवार-शनिवार आधी रात से दर्शन और पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। मंदिर परिसर को भव्यता प्रदान की जा रही है।

फूल बंगला भी सजाया जाएगा। मंदिर परिसर के बाहर से बैरीकेडिंग के माध्यम से कतारबद्ध श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचेंगे। सरसों का तेल, नारियल एवं प्रसाद अर्पण के लिए परिसर में कई जगह प्रतीकात्मक प्रतिमाओं के साथ तेलकुंड रखवाए जाएंगे। शनि मंदिर पर पुराने वस्त्र, जूते त्यागने और मुंडन कराने का महत्व है। जिन लोगों का कष्ट निवारण हो जाता है वे शनि मंदिर की शरण आकर वस्त्र त्यागते हैं, मुंंंडन कराते हैं और सरसों का तेल अर्पित करते हैं।

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