भोपाल-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने बड़ेे डिफाल्टरों से टैक्स वसूली के लिए नया रास्ता तलाश लिया है। इसके तहत उन्हें एक ओर जहां जेल भेजने का भय दिखाया जा रहा है, वहीं एकमुश्त समझौते का ऑफर भी दिया गया है। दोनों राज्यों में साढ़े आठ सौ से अधिक करदाताओं और कारोबारियों पर विभाग के अरबों रुपए की टैक्स वसूली फंसी है।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स ने इस साल मप्र आयकर विभाग को टैक्स वसूली के लिए भारी-भरकम टारगेट (करीब 29 हजार करोड़ रुपए) दिया है। पिछले वर्ष विभाग को तमाम प्रयासों के बाद दोनों राज्यों से बमुश्किल 21 हजार 773 करोड़ रुपए की टैक्स वसूली हो पाई थी जो कि टारगेट से 400 करोड़ रुपए कम थी।
अब इस साल विभाग को एकाएक 7 हजार 200 करोड़ रुपए और जुटाने को कहा गया है। इसलिए दोनों राज्यों में ऐसे पुराने टैक्स वसूली के मामलों को निकाला गया है जो अदालतों और अपील में फंसे हैं। हाल ही में दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में भी टैक्स वसूली के नए स्त्रोत तलाशने पर विचार मंथन किया गया।
टैक्स वसूली के 860 मामले
दोनों राज्यों में 860 से अधिक ऐसे मामले चिन्हित किए गए हैं जिनमें अरबों रुपए की टैक्स वसूली फंसी हुई है। इसमें टैक्स की मूल के साथ जुर्माना और ब्याज की राशि भी है। दोनों राज्यों में सभी कमिश्नरेट के पास इन डिफाल्टरों की सूची मौजूद है, सभी बकायादारों को नोटिस भेजकर कहा गया है कि उनके पास मामला खत्म करने का अंतिम मौका है। एकमुश्त समझौता के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। इसके बाद प्रासीक्यूशन की कार्रवाई तेज कर दी जाएगी जिसमें डिफाल्टरों सख्त कार्रवाई और जेल भेजने का भय भी दिखाया गया है।
अदालतों में वर्षों से अटके हैं मामले
डिफाल्टरों में टीडीएस डिफाल्टर, नॉन पैमेंट और नॉन फाइलर्स भी शामिल हैं, जिन लोगों ने आवश्यक होने के बावजूद लगातार लंबे समय से रिटर्न दाखिल नहीं किया उन्हें भी निशाने पर लिया गया है। कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें बड़ी राशि की लेनदारी है लेकिन वर्षों से मामला कोर्ट में ही अटके पड़े हैं।
यही कारण है कि उन्हें कंपाउंडिंग फीस जमा कर एकमुश्त समझौते पर सहमत होने का विकल्प दिया गया है। इस प्रक्रिया को शुरू करने के बाद ही प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपनी ओर से आर्डर जारी कर प्रकरण खत्म करने की अनुमति देंगे।
डिफाल्टरों को अंतिम अवसर
विभाग ने दोनों राज्यों में वर्षों से चल रहे अदालती प्रकरणों को सुलझाने और बकाया राशि वसूलने के लिए डिफाल्टरों को दिसंबर के पहले मामला खत्म करने का अंतिम मौका दिया है। इसके बाद प्रासीक्यूशन की कार्रवाई शुरू हो जाएगी जिसमें जुर्माने के बाद जेल भेजने का भी प्रावधान है।
– ए के चौहान, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त मप्र-छग
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