आंगनबाड़ी में पोषण आहार सप्लाई बंद करते-करते 7 कंपनियों ने 18 माह में कर लिया 1050 करोड़ का कारोबार
ग्वालियर-
आइए, बचाएं जरूरतमंद बच्चों का भोजन नई व्यवस्था लागू हाेने में लेटलतीफी का फायदा, सप्लाई अभी भी जारी …
आइए, बचाएं जरूरतमंद बच्चों का भोजन

नई व्यवस्था लागू हाेने में लेटलतीफी का फायदा, सप्लाई अभी भी जारी
आंगनबाड़ी में हर माह 55 से 60 करोड़ की सप्लाई इन्हीं कंपनियों के जरिए सबसे ज्यादा काम उन्हीं तीन कंपनियों को मिला जो पूर्व में विवादित रहीं
चौंकाने वाले तथ्य हैं कि अप्रैल-मई 2018 में नई व्यवस्था बनने तक पोषण आहार सप्लाई का काम कुछ समय के लिए पूर्व की तीन कंपनियों समेत सात कंपनियों को दिया गया। इन सातों कंपनियों ने हर माह मिलाकर करीब 55 से 60 करोड़ रुपए का पोषण आहार प्रदेश की आंगनबाड़ियों में सप्लाई किया। अप्रैल-मई 2018 से लेकर कंपनियों की सप्लाई अभी भी जारी है। साफ है कि सरकार ने नई व्यवस्था बनाने में इतना वक्त लगा दिया कि इन कंपनियों ने सितंबर तक ही करीब 1050 करोड़ का कारोबार कर लिया। चूंकि बुधवार को कैबिनेट ने इनका शॉर्ट टर्म ठेका दिसंबर तक बढ़ा दिया है, लिहाजा स्पष्ट है तब तक ये 1200 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार कर लेंगी।
निजी क्षेत्र की इन सात कंपनियों के पास संभाग और औसत सप्लाई
1. एमपी एग्रो न्यूट्री फूड प्रालि : एक साल तक इसके पास इंदौर और उज्जैन संभाग के जिले रहे। इसने अप्रैल 2018 से अप्रैल 2019 तक 800 से 1000 टन प्रतिमाह पोषण आहार की सप्लाई दी। इसकी करीब 6-7 करोड़ है।
2. एमपी एग्रोटॉनिक्स लिमिटेड : रीवा और सागर संभाग में हर माह 1400 से 1500 टन आहार की सप्लाई की और करीब 10 करोड़ रुपए का कारोबार किया। इसकी सप्लाई अभी भी जारी है।
3. एमपी एग्रो फूड इंडस्ट्रीज : ग्वालियर संभाग इनके पास है। यहां 1100 से 1200 टन की सप्लाई हर माह हुई। कंपनी ने हर माह करीब 8 करोड़ रुपए का कारोबार किया।
4. जयपुर की फ्लोरा फूड : नर्मदापुरम संभाग में इस कंपनी ने 200 टन पोषाहार की सप्लाई की और 1.5 से दो करोड़ रुपए का कारोबार किया।
5. नोएडा की बिहारी एग्रो फूड : 350 टन शहडोल संभाग में दिया। 2-3 करोड़ का कारोबार किया।
6. कोटा की कोटा दाल मिल : इस कंपनी ने जबलपुर संभाग में 1600 टन पोषाहार सप्लाई किया और 10 से 11 करोड़ का कारोबार किया।
7. दिल्ली की सुरुचि फूड : चंबल संभाग में 900 से 1000 टन पोषण आहार के जरिए करीब 6 करोड़ का बिजनेस किया।
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