Warning: Trying to access array offset on value of type bool in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/functions/common-scripts.php on line 150

फेसबुक, वाट्सएप पर सोशल रहने की बजाय असली दुनिया में लोगों से मेलजोल बढ़ाएं, चुरा रहा स्मार्ट फोन आपकी याददाश्त , 70 की बीमारी 40 में घेर रही

ग्वालियर-
 
काम करते करते अचानक ध्यान भटक जाना रोजमर्रा की बातों को भूलना, और चीजें रखकर लगातार भूलना, यह समस्या आजकल बढ़ती जा रही है। कुछ समय पहले तक भूलना बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी पर बदलते दौर में यह बीमारी युवा अवस्था में ही लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। भूलना सामान्य प्रक्रिया होने के साथ-साथ बीमारी भी है जिसे ‘अल्जाइमर’ कहा जाता है। जब भूलने की परेशानी जरूरत से ज्यादा हो जाए तो व्यक्ति मरीज की श्रेणी में आ जाता है। इसके पीछे ब्रेन में उचित तत्वों की संरचना में गड़बड़ी होना है जो सही समय पर पकड़ में आना जरूरी है।
 
जीआर मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग के प्रमुख प्रो. दिनेश उदैनिया बताते हैं कि अल्जाइमर एक अनुवांशिक बीमारी है। यदि किसी की फैमिली हिस्ट्री में अल्जाइमर है तो उसकी अगली जनरेशन को यह बीमारी कम उम्र में जकड़ लेगी। मसलन पिता को 65 की उम्र में अल्जाइमर होता है तो उसके बच्चे को 50 से 55 वर्ष की उम्र में यह बीमारी होगी और अगली जनरेशन को 50 से कम उम्र में ही यह बीमारी जकड़ लेगी। वहीं करीब 40 से भी कम उम्र के युवाओं में मोबाइल के कारण युवा सूडो-डिमेंशिया से पीड़ित हो रहे हैं। यह ऐसी बीमारी है जिसमें चीजें भूलने लगते हैं, अनिद्रा की शिकायत होने लगती है। दरअसल इसका कारण है मोबाइल और इंटरनेट पर सूचनाओं की बाढ़। मोबाइल पर सूचना के मल्टीपल सोर्स होते हैं। कई बार इमोशनल पोस्ट आती हैं जिन्हें पढ़कर हम भावुक भी हो जाते हैं। इतनी अधिक सूचनाओं के बीच फोकस कम होने लगता है और सूडो-डिमेंशिया जैसी समस्या आने लगती है।
 
उम्र 40 पार होने पर सतर्क होना जरूरी
 
विशेषज्ञों के अनुसार उम्र 40 वर्ष के पार होने पर सतर्कता जरूरी है। इस बीमारी के संकेत उम्र के इसी दौर में मिलने लगते हैं। अगर सही समय पर उपचार शुरू हो जाए तो भविष्य में बहुत ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार पहले सिर्फ 70 वर्ष से ऊपर के लोगों में अल्जाइमर माना जाता था लेकिन अब 40 वर्ष में भी लोग इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं।
 
ब्रेन में प्रोटीन की संरचना में गड़बड़ी से होती है समस्या
 
विशेषज्ञों के अनुसार 25 वर्ष पहले अल्जाइमर को विकसित देशों की बीमारी माना जाता था लेकिन अब भारत में औसत आयु बढ़ने और ज्यादा उम्र तक लोगों के काम करने से यहां भी बीमारी पहचान में आ रही है। दरअसल ब्रेन में प्रोटीन की संरचना में गड़बड़ी के कारण समस्या होती है। दिमाग में केमिकल और पैथोलॉजिकल बदलाव होते हैं। इससे दिमाग और शरीर का संपर्क टूटने लगता है। कम उम्र में ही लक्षणों को भांपकर पकड़ लेना ज्यादा जरूरी है क्योंकि बढ़ी उम्र में ब्रेन में केमिकल खत्म होने लगता है। एमआरआई से समस्या को समझा जा सकता है।
 
अब तक पुख्ता इलाज नहीं
 
एक तरफ अल्जाइमर के मरीजों की संख्या में दिन ब दिन बढ़ोतरी हो रही है लेकिन इसका पुख्ता इलाज अब भी चिकित्सकों के पास नहीं है। बीते 20 वर्षों में उपचार के लिए कोई नई दवा बाजार में नहीं आई है। चिकित्सक भी इस बात को मानते हैं कि उपचार में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आए हैं। मरीज के लक्षणों के आधार पर चिकित्सक इलाज करते हैं। इसमें कुछ मरीज न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाते हैं तो कुछ मनोचिकित्सक के पास। अभी भी इसके सौ प्रतिशत निदान पर अध्ययन चल रहे हैं।
 
जेयू में रिसर्च में सामने आई यह परेशानी
 
जीवाजी विवि में इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल के प्रोजेक्ट के तहत मोबाइल फोन के इफेक्ट्स पर की जा रही रिसर्च के प्रारंभिक नतीजों में यह बात सामने आई है कि मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से न्यूरोडीजनरेशन होता है। इससे व्यक्ति की याद रखने की क्षमता कम होने लगती है। इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति तीन महीने तक औसतन रोज 4 घंटे मोबाइल इस्तेमाल करता है तो न्यूरो सेल्स को नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है।
 
 
 
किस उम्र में कितने फीसदी मरीज
 
80 साल से ऊपर 25 फीसदी,
 
70 से 80 साल 10 फीसदी,
 
60 से 70 साल 5 फीसदी
 
40 से 60 साल 3 फीसदी
 
 
 
भारत की स्थिति
 
40 लाख भारतीय डिमेंशिया से पीड़ित वर्तमान में
 
16 लाख इनमें से अकेले अल्जाइमर के शिकार
 
चीन- अमेरिका के बाद भारत का नंबर
 
देश मरीज (लाख में)
 
चीन 95
 
अमेरिका 42
 
भारत 41
 
जापान 31
 
ब्राजील 16
 
(विश्व अल्जाइमर रिपोर्ट-2015 के अनुसार)
 
 
अगर ऐसा है तो घबराएं नहीं…
 
चिकित्सक यह भी मानते हैं कि छोटी-छोटी बातों को भूल जाना यह मानव स्वभाव की सामान्य बात है। अगर ऐसा है तो बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। इसका और बीमारी का वास्ता नहीं है। जैसे-
 
-चाबी रखकर भूल जाना
 
-फोन लगाते-लगाते भूल जाना कि किसे लगा रहे थे
 
-काम में व्यस्तता के चलते खाना खाना भूल जाना
 
-किसी ने चाय या खाने पर बुलाया था और एकदम दिमाग से निकल जाना
 
-भाषण देते हुए शब्द भूल जाना
 
– परीक्षा में याद किया हुआ भूलना
 
ऐसा हो रहा है तो सतर्क हो जाएं
 
– किसी काम में मन एकाग्र नहीं होना
 
– जरूरी फैसला लेते समय आत्मविश्वास कम होना
 
– सामान्य बातचीत में बार-बार शब्द भूलना, वाक्य नहीं बन पाना
 
– रोजमर्रा की दिनचर्या में तेजी से बदलाव
 
– रोज आने-जाने वाले रास्तों में उलझना
 
ये बातें बीमारी से बचा सकती हैं-
 
सोशल मीडिया से ज्यादा असली दुनिया से संपर्क
 
-बुद्धि का बैलेंस बनाकर चलें, मानसिक स्वस्थता जरूरी
 
-खेल गतिविधियों व उचित व्यायाम से शरीर और दिमागी तंदुरुस्ती बनी रहती है
 
-गुस्सा, चिड़चिड़ेपन से दूर रहें। खुद भी खुश रहें और दूसरे को भी खुश रखें
 
-फेसबुक, वाट्सएप पर सोशल रहने की बजाय असली दुनिया में लोगों से मेलजोल बढ़ाएं।
loading...

Warning: Undefined array key "tie_hide_share" in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65

Warning: Trying to access array offset on value of type null in /home/sites/43a/e/ed29062570/public_html/wp-content/themes/jarida/single.php on line 65
x

Check Also

खेलों के माध्यम से युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन का संदेश

राष्ट्रीय खेल दिवस पर साइकिल रैली एवं अंडर-17 मैत्री क्रिकेट प्रतियोगिता आयोजित बढ़ता कारवां (BK ...