ग्वालियर
गोबर और घास से गौकाष्ठ बनाने की मशीन प्रदेश सहित उत्तरप्रदेश में धूम मचा रही है। मशीन के कार्य को देखते हुए इसकी मांग विभिन्न जिलों से आ रही है। ग्वालियर से अभी तक भोपाल सहित विभिन्न जिलों में 25 मशीन की सप्लाई हो चुकी है। मशीन की कीमत भी बेहद कम है। सबसे छोटी मशीन की कीमत मात्र 35 हजार है जबकि सबसे बड़ी मशीन की कीमत 60 हजार रुपए है। नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में इस मशीन से प्रतिदिन 1.5 टन गोबर से गौकाष्ठ बनाई जा रही हैं।
ग्वालियर में रहने वाले रमेश कुशवाह ने दो साल पहले ग्वालियर में गोबर और बेकार भूसे से लकड़ी बनाने की मशीन तैयार की थी। इस मशीन में एक तरफ से गोबर और भूसा मिलाकर डाला जाता है। जबकि दूसरी तरफ से तीन फीट लम्बी और 6 इंच मोटी लकड़ी तैयार होकर निकलती है। इस लकड़ी को सूखा लेने के बाद इसका उपयोग अंतिम संस्कार में किया जाता है।
लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में हो रहा है गोकाष्ठों का उपयोग
नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में तैयार हुए गौकाष्ठों का उपयोग लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में किया जा रहा है। यहां पर गौकाष्ठों से प्रतिदिन 2 से 3 लोगों के अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। हालांकि यहां पर जागरूकता की कमी के कारण आज भी अधिकांश लोग लकड़ी से अंतिम संस्कार करा रहे हैं।
इन जिलों में भेजी गई है मशीन
गोबर से गौकाष्ठ बनाने वाली सर्वाधिक मशीनें भोपाल जिले में भेजी गई हैं। यहां पर ग्वालियर से अभी तक 18 मशीनें भेजी जा चुकी हैं। इनके साथ ही मंदसौर में एक, रतलाम में एक, भिलाई में एक, कानपुर में एक, सिहौर में एक, मुरैना स्थित देवरी गौशाला में एक मशीन भेजी जा चुकी है।
1100 रुपए में अंतिम संस्कार
लक्ष्मीगंज मुक्तिधाम में गौकाष्ठों से महज 1100 रुपए में अंतिम संस्कार किया जाता है। एक अंतिम संस्कार में 3 क्वींटल गौकाष्ठों का उपयोग किया जाता है। वहीं जब लकड़ी और कण्डों से अंतिम संस्कार किया जाता है तो उसमें खर्चा 4500 से 5000 रुपए का आता है। इसके साथ ही गौकाष्ठों से किए गए अंतिम संस्कार के 6 घंटे बाद ही अस्थि संचय किया जा सकता है। जबकि लकड़ी से किए गए अंतिम संस्कार में अस्थि संचय के लिए 24 घंटे का समय लगता है।
तीन प्रारूप में मिलती है मशीन
गौकाष्ठ बनाने वाली पहली मशीन की कीमत 60 हजार रुपए है यह 8 घंटे में 1.5 टन गोबर और घास से गौकाष्ठ बना सकती है। इसमें 3 फेस की मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी मशीन 45 हजार रुपए की है यह 1.25 से 1.50 टन गौकाष्ठ 8 घंटे में बना सकती है। इसमें भी 3 फेस की मोटर लगाई जाती है। इसी प्रकार तीसरी मशीन 35 हजार की है इसमें सिंगल फेस की मोटर लगाई जाती है। यह मशीन 8 घंटे में 1 टन गौकाष्ठ बना सकती है।
इस मशीन को मैंने ही तैयार किया है, सर्वप्रथम इसे नगर निगम की लालटिपारा गौशाला में लगाया गया था। इस मशीन से बने गौकाष्ठों का उपयोग अंतिम संस्कार सहित होलिका दहन में भी किया जाता है। अभी तक भोपाल सहित अन्य जिलों में मशीनें बनाकर भेजी जा चुकी हैं। साथ ही और भी जगह से आर्डर आए हैं।
रमेश कुशवाह
मशीन निर्माता
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