ग्वालियर
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत हितग्राहियों को 50 हजार रुपए से लेकर 10 लाख रुपए तक के लोन स्वीकृत किए जाते हैं। इसके लिए जिले में 17 विभागों के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। इन लोन पर दो लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलती है। गत वर्ष तक शासन का नियम था कि जैसे ही बैंक लोन स्वीकृत करेंगे, तो वे किश्त का भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से सब्सिडी की राशि मंगा लेते थे। अब प्रक्रिया में परिवर्तन हो गया है और लोन स्वीकृत होने के बाद सब्सिडी की ऑनलाइन डिमांड की जाती है। पिछले आठ माह में इन विभागों ने लगभग 800 हितग्राहियों से लोन के लिए आवेदन मंगाए और उन्हें बैठक में रखकर बैंकों को फॉरवर्ड कर दिया। बैंकों ने भी आवेदकों की पात्रता देखने के बाद लोन स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी, लेकिन अब ज्यादातर विभागों के आवेदनों में सब्सिडी का ऑनलाइन भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। कुछ हितग्राहियों की शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि सरकार का खजाना खाली होने के कारण हितग्राहियों को सब्सिडी का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके चलते बैंक भी संबंधित विभागों को पत्र लिखकर सब्सिडी की मांग कर रही हैं।
ये है सब्सिडी का हिसाब-किताब
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 50 हजार रुपए से लेकर अधिकतम 10 लाख का लोन स्वीकृत किया जाता है। इसमें सामान्य वर्ग को 15 प्रतिशत सब्सिडी यानी अधिकतम एक लाख रुपए की सब्सिडी मिलती है। बीपीएल, एससी, एसटी, ओबीसी, महिला, अल्पसंख्यक और नि:शक्तजनों को 30 प्रतिशत यानी अधिकतम दो लाख रुपए की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस लोन की अवधि सात वर्ष की होती है और पूरी अवधि में संबंधित विभाग द्वारा अधिकतम 25 हजार रुपए सालाना की ब्याज की सब्सिडी भी दी जाती है।
कर्ज माफी में गया पैसा
जानकारों के मुताबिक अभी तक लोन के लिए सब्सिडी की राशि विभागों को वितरित की जाती थी, लेकिन चुनाव के समय कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी की घोषणा की थी। ऐसे में सब्सिडी की राशि में कटौती कर किसानों की कर्ज माफी कर दी गई, लेकिन विभागों में आवेदनों का आना लगातार बरकरार रहा। यहां अफसर प्रकरणों की पूरी प्रक्रिया करते रहे। अब स्थिति यह है कि एक-एक आवेदक पांच से सात हजार रुपए प्रक्रिया में खर्च करने के बाद भी सब्सिडी से वंचित हो रहा है।
प्रकरणों में आई है दिक्कत
 शासन ने अब सब्सिडी जारी करनी शुरू कर दी है। हमने कुछ लोगों को सब्सिडी दी भी है। कुछ प्रकरणों में तकनीकी कारणों के चलते सब्सिडी की दिक्कत आई है, लेकिन हम उन्हें भी पास कराने के प्रयास कर रहे हैं। अरविंद बोहरे, महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र
भुगतान के लिए एक-दूसरे से पत्राचार कर रहे हैं बैंक और विभाग
हम संबंधित विभागों से कर रहे हैं बात
सब्सिडी न मिलने से जुड़े जो भी प्रकरण हमारे संज्ञान में आ रहे हैं, उनको लेकर हम संबंधित बैंक और विभाग से बात कर रहे हैं। हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि हितग्राहियों को सब्सिडी मिले। ऐसे प्रकरणों को हम दोबारा रिव्यू कराकर सब्सिडी के संबंध में उचित कार्रवाई करेंगे। संदीप कुमार, लीड बैंक मैनेजर, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
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