बढ़ता कारवाँ/सिंगरौली (जमुना सोनी) बैढन नाजी युवा संघ जिला महासचिव- लाखन सिंह कुशराम ने बताया कि आने वाले 01 सितंबर 2019 से “नाजी युवा संघ सिंगरौली” के तत्वाधान में पूरे जिले के अंदर गांव-गांव व कालेजों में सामूहिक रूप से महा सदस्यता अभियान चलायेगा और संघ को मजबूती के साथ एससी-एसटी- ओबीसी वर्ग के युवाओं को शिक्षित बनो,संघर्ष करो,संगठित रहो के साथ संघ का अंग बनो के नारे पर जिले भर में संगठन सक्रिय रूप से विस्तार कर समाज की हर वर्ग को न्याय दिलाने के लिये कार्य करेगी ।
(1) ऑनलाइन प्रवेश प्रकिया में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग की आरक्षण में रोस्टर का पालन करना (2) बुक बैंक योजना योजना अंतर्गत वितरित किये जाने वाले पुस्तको को दिलवाना एवं मदद करना (3) शासन द्वारा एससी/एसटी/ओबीसी को दिलाने वाले छात्रवृत्ति एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिये जाने वाली सहायता राशि को समय सीमा में दिलाया जाने हेतु (4)एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं को शासन द्वारा प्रदत्त सुविधाओं को दिलाया जाने हेतु (5) महाविद्यालयों में प्रायोगिक कक्षाओं को संचालित कराना (6) महाविद्यालयों में जनभागीदारी मद से एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग को सहायता प्रदान कराना (7) महाविद्यालयों में समस्त संकाय या विषयों की उच्च शिक्षा द्वारा निर्धारित कलेण्डर अनुसार कक्षाएं संचालित कराने के लिए पहल करना (8) विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आईआईटी,आईआईएम क्लैट, नर्सिंग, डी फार्मा, बी फार्मा में चयनित एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग के छात्र – छात्राओं की समस्त शुल्क शासन द्वारा वहन किया जाये ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एससी-एसटी ओबीसी वर्ग के छात्र-छात्राओं प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी हो सकें (9) मुख्यमंत्री द्वारा मध्यप्रदेश में लगने वाले उद्योगों में 70% स्थानीय लोगों को जो रोजगार देने की घोषणा की गयी है उसमें एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाये (10) अनुसूचित जाति /जनजाति और ओबीसी वर्ग के छात्रवृत्ति की अन्य सुविधाओं के लिये आय सीमा 8 लाख बढ़ाकर किया जाये और जिस प्रकार से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की आय-सीमा 8 लाख रुपये रखी गयी है ।

युवाओं को जागरूक करने के लिये अंबेडकरवादी विचारधारा से जोड़ा जायेगा ताकि उनको पता चले कि समाज की दयनीय स्थिति क्या है भले ही आज कुछ चंद लोग थोड़ा बहुत नौकरी- रुपये पैसा बना लिये हैं पर समाज में ग़रीबी – भूखमरी- बेरोजगारी – पीड़ित – शोषित वंचित पड़ा हुआ है वही आज भी गांवों तक शिक्षा – स्वास्थ्य – रोजगार बुनियादी चीजें हैं वह गरीब लोगों तक नहीं पहुंच पायी है और नाजी संघ ने युवाओं को संगठन के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं को मुक्ति दिलाने के लिये कई तरह से मुख्य धारा से जोड़ने के लिये समय-समय पर जन चौपाल का आयोजन किया जायेगा और जिससे गांवों में पिछड़े समाज को यह पता चले कि वास्तव में आज तक आजादी के 70 साल से ऊपर हो गये हैं परंतु स्थिति जैसी की वैसी बनी हुई है।
नाजी संघ ने यह भी निर्णय लिया है कि आज तक हमारे समाज के साथ जो धोखा करता है उसके विश्वासघात पर जवाब देने के लिये हम सक्षम है और जैसे कि मध्य प्रदेश में कई वर्षों से एससी/ एसटी/ओबीसी वर्ग के रिक्त पड़े बैकलॉग पदों की भर्ती आज तक नहीं हुई है और सिंगरौली जिले में लगभग 40% आदिवासी निवास करते हैं उनका रोस्टर पालन नहीं हुआ और कई विभागों में बिना रोस्टर का पालन करते हुये आउटसोर्सिंग से विभागीय भर्ती कर लिया गया है जिसके लिये संगठन दोषियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही के लिये बाध्य होगी ।
वही चितरंगी तहसील को आदिवासी तहसील घोषित करवाने के लिये शासन – प्रशासन से समय-समय पर पत्र के माध्यम से जानकारी देगी एवं घोषणा करवायेगी और वनाधिकार अधिनियम 2006 को मध्यप्रदेश में पूर्ण रुप से लागू करवाना और आदिवासियों को बनवासी न कहा जाये बनवासी शब्द पूर्ववर्ती सरकारों एवं वर्तमान केंद्र सरकार ने बनवासी शब्द लागू किया है और उसे तत्काल समाप्त करके शुद्ध आदिवासी नाम से जाना जाये और वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार ने आदिवासियों को बनवासी के नाम से रूपांतरण कर दिया है उसे समाप्त कर आदिवासी ही रहने दें और उन्हें भी संघ पत्र भेजेगा।
कई बीजेपी शासित राज्य हैं जहां आदिवासियों को बनवासी के नाम एवं वनवासी आश्रम चलाये जा रहे हैं उन्हें तत्काल संगठन बन्द करवाने के लिये पत्र जारी करेगा, पाचवीं अनुसूची एवं छठवीं अनुसूची में लागू करवाने के लिये संगठन समय-समय पर शासन – प्रशासन को पत्र के माध्यम से अवगत करता रहेगा ।
पांचवी अनुसूची के अनुसार:-,संविधान के अनुच्छेद 244 (1) में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए यह व्यवस्था की गयी है। पांचवी अनुसूची के अंतर्गत धारा 244 (1) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में सिर्फ आदिवासियों का राज चलेगा और 20 सदस्यीय की टीम होगी जिसमें जनजातीय सलाहकार परिषद कहेंगे जो क्षेत्र के आदिवासियों के विकास और संरक्षण के लिये समय-समय पर शिक्षा – स्वास्थ्य – रोजगार, कुपोषण – भुखमरी – बेरोजगारी की जानकारी हर 3 महीने एवं छह महीने या जब राष्ट्रपति चाहे तब जानकारी राष्ट्रपति कार्यालय को भेजती रहेगी।
अनुसूचित क्षेत्रों में शराब की ठेके और दुकानें नहीं खुल सकती हैं और जिले में चपरासी से लेकर कलेक्टर तक सभी कर्मचारी-अधिकारी अनुसूचित वर्ग के रहेंगे जो सौ प्रतिशत आरक्षण रहेगा और आदिवासियों के मर्जी के बिना कोई भी गैर आदिवासी चाहे वह कलेक्टर हो और चाहे प्रधानमंत्री क्यों न हो अनुसूचित क्षेत्रों में बिना आदिवासियों की मर्जी से क्षेत्र में नहीं घुस सकता है। अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के विवाद झगड़े या जमीन संबंधित विवाद के लिये उस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी को पुलिस थाने या कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है गांव के आदिवासी ही आपस में मिलकर विवाद का निपटारा कर सकते हैं और आदिवासी को जमीन के नीचे लोहा – सोना- चांदी – कोयला – बाक्साइट और तमाम तरह की कीमती धातु का मालिक आदिवासी ही रहेगा और कहने का मतलब सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा है जिसकी जमीन है उसकी जमीन से निकलने वाले सोने – चांदी का मालिक वहां वही रहेगा मतलब आदिवासियों को सरकार से भीख मांगने की जरूरत नहीं है वह अपने आप अमीर हो जायेगा ।
अनुसूचित क्षेत्रों में आने – वाले जंगलों – नदियों – तालाबों – पहाड़ों – वनसंपदा पर नियंत्रण सिर्फ आदिवासियों का होगा अनुसूचित जाति वर्ग की जो जमीने अन्य वर्ग को खरीदने का अधिकार है उसे समाप्त करवाकर फिर वापस उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलवाना इन कई सारे मुद्दों के साथ नाजी संघ समाज की आवाज को उठाने का कार्य करता रहेगा ।
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