ग्वालियर- मिठाइयों आदि की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जो कार्रवाई की जा रही हैं। उनसे डेयरी संचालकों व अन्य खाद्य सामग्री विक्रेताओं को घबराना नहीं चाहिए। व्यापारियों को चाहिए कि जो कमियां हैं उन्हें दूर करें। खाद्य सामग्री स्थल व विक्रय स्थल पर यथासंभव सीसीटीवी कैमरे लगाएं। मिठाइयों आदि को बनते हुए जनता देख सके इसके लिए दुकान के बाहर एक स्क्रीन लगा दें। अगर यह पारदर्शिता लाई जाती है तो सभी के लिए हितकर है। यह बात कलेक्टर अनुराग चौधरी ने शहर के डेयरी संचालक व अन्य खाद्य सामग्री व्यापारियों से कही।

दरअसल खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई के संबंध में व्यापारियों का एक समूह चैंबर ऑफ कॉमर्स के नेतृत्व में कलेक्टर से भेंट करने पहुंचा था। इस दौरान व्यापारियों ने जहां कलेक्टर को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। वहीं कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन द्वारा कार्रवाई लोगों की सेहत को ध्यान में रखकर की जा रही है, जो लगातार जारी रहेगी। चैंबर अध्यक्ष विजय गोयल ने कलेक्टर से कहा कि प्रशासन द्वारा मिलावटखोरों पर लगातार कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन ईमानदार व्यापारियों की साख पर बट्टा न लगे इस बात का भी खयाल रखना जरूरी है। वहीं चैंबर के मानसेवी सचिव डॉ.प्रवीण अग्रवाल ने कहा कि मिलावटखोरी रोकने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे यह वचन देते हैं। लेकिन निर्दोष व्यापारी कार्रवाई का शिकार न हों इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मानसेवी सचिव ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जो दंड का प्रावधान है, उसके तहत मिलावटखोरों पर कार्रवाई होनी चाहिए न कि व्यापारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। साथ ही खाद्य पदार्थ की सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। बैठक में चैंबर के कार्यकारिणी सदस्य एवं दाल बाजार एसोसिएशन के सचिव मनीष बांदिल, नरेन्द्र मांडिल एवं विचित्र कुमार गुप्ता समेत अन्य व्यापारी मौजूद रहे। व्यापारियों ने यह की मांग -खाद्य सुरक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जानी चाहिए। क्योंकि जिस अधिकारी ने कार्रवाई की है, वह स्वयं अपनी ही कार्रवाई को गलत नहीं ठहराएगा। -जब तक मिलावट स्पष्ट न हो तब तक संस्थान को सीज नहीं किया जाए। अधिनियम में भी संस्थान को सीज करने का प्रावधान नहीं है। सीज करने की आवश्यकता पड़ने पर विवादित खाद्य पदार्थ के स्टॉक को ही सीज किया जाए, पूरे व्यापारिक परिसर को नहीं। -नमूना लेने के बाद विभाग द्वारा संबंधित व्यापारी को नमूने का विक्रय मूल्य तथा अधिनियम के अंतर्गत आने वाला फार्म 5-ए की प्रति दी जानी चाहिए। -जांच में देरी होने पर नमूना फेल हो जाता है, इसके लिए व्यापारी जवाबदेह नहीं है। अतः नमूनों की जांच जल्द होना चाहिए व जानकारी जल्द व्यापारी को दी जानी चाहिए। -व्यापारी के पास अगर ब्रांडेड सामग्री है, जिसका उसके पास मूल बिल भी है। तो व्यापारी को फर्स्ट पार्टी बनाकर कार्रवाई नहीं होना चाहिए। -व्यापारियों के सहयोग के लिए फूड सेफ्टी पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाने चाहिए। -मानक का निर्धारण वर्तमान परिस्थिति अनुसार परिवर्तित होना चाहिए। मवेशी पहले जो चारा व अन्य सामग्री खाते थे, उससे दूध का फेट अधिक होता था। अब ऐसा नहीं है, इसलिए दूध के सैंपल फेल हो जाते हैं। कलेक्टर ने बिंदुओं पर जताई सहमति -जो परिसर सीज किए गए हैं, उन्होंने अगर कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली हैं तो खुलवाया जाएगा। -फूड सेफ्टी पर जागरूकता कार्यक्रम व सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। -पारदर्शिता लाने खाद्य सामग्री विक्रय स्थल व प्रोसेसिंग स्थल पर यथासंभव सीसीटीवी लगाए जाएं। -फार्म 5-ए दिया जाए यह निश्चित करेंगे। जब तक प्रत्यक्ष गड़बड़ी व मिलावट उजाकर नहीं होगी सीज नहीं किया जाएगा। -व्यापारियों से बांड भरवाया जाएगा, जिसमें फूड सेफ्टी एक्ट का पालन करने का उल्लेख होगा
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