ग्वालियर
झांसी मंडल में बने 791 छोटे-बड़े पुल अपनी रिटायरमेंट की अवधि पार कर चुके हैं, जबकि अब तक इन पुलों को बंद कर देना चाहिए या इनकी जगह नए पुल का निर्माण होना चाहिए था। मगर रेलवे अब भी इन पुल को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए प्रयोग कर रहा है। दिलचस्प बात ये है कि ट्रेनों की लेटलतीफी का ये बूढ़े पुल भी बड़ा कारण हैं, क्योंकि इनसे निकलते समय ट्रेन की रफ्तार कम करना पड़ती है। जिससे ट्रेन की टाइमिंग प्रभावित होती है।
रेलवे बुलट ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है, जबकि रेल लाइन पर बने पुल काफी पुराने हो चुके हैं। वर्तमान में सेमी हाईस्पीड ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस व शताब्दी एक्सप्रेस भी इन बूढ़े पुलों से ही गुजर रही हैं। यही ट्रेनों की लेटलतीफी का बड़ा कारण भी है। सूत्रों की मानें तो ऐसे पुलों से जब ट्रेन गुजरती है तो रफ्तार कम कर दी जाती है। उदाहरण के लिए यदि सामान्य ट्रैक पर ट्रेन 90 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है तो इन पुलों से गुजरते समय रफ्तार आधी रह जाती है। यदि पुल की स्थिति खराब है तो कॉशन लेकर ट्रेन निकाली जाती है। इससे ट्रेनों की टाइमिंग 3 से 5 मिनट तक प्रभावित होती है।
इंजीनियर करते हैं नियमित निरीक्षणः
वैसे तो रेलवे बोर्ड द्वारा गठित कमेटी ने पुल की आयु निर्धारित कर दी है, मगर रेलवे के सेक्शन इंजीनियरों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। इंजीनियर का काम यह देखना होता है कि पुल की स्थिति कैसी है। यदि कहीं भी कोई गड़बड़ी मिलती है तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया जाता है। रेलवे इन पुलों का मेंटेनेंस करके काम चला रहा है।
कितने पुल हुए बूढेः
झांसी मंडल में छोटे-बड़े 791 पुल 100 साल की मियाद पूरी कर चुके हैं। बीना-आगरा कैंट रेल लाइन पर 309, झांसी-कानपुर रेल लाइन पर 7, झांसी-मानिकपुर के बीच 303, धौलपुर छोटी लाइन पर 46 व ग्वालियर-श्योपुर छोटी लाइन पर 117 छोटे-बड़े पुल हैं। खास बात ये है कि अपनी उम्र पूरी कर चुके इन पुलों के दोबारा निर्माण की जरूरत महसूस की जाने लगी है, लेकिन रेलवे अधिकारी अब तक इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि इसके कारण कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
क्या है पुलों की निर्धारित आयुः
रेलवे बोर्ड द्वारा गठित समिति के अनुसार स्टील वर्क्स के ब्रिज की उम्र 60 साल, मेसोनरी ब्रिज की 100, स्ट्रक्चर स्टील ब्रिज की 60 साल, मेसोनरी एंड सीमेंट कंक्रीट ब्रिज की 65 साल, आरसीसी ब्रिज की 60 साल एवं कंक्रीट ब्रिज की औसत उम्र 40 साल तय की गई है।
वर्जनः
आमतौर पर ट्रेनों की टाइमिंग निर्धारित करते समय ही कॉशन या अन्य चीजों को शामिल किया जाता है। साथ ही इंजीनियर भी समय-समय पर ब्रिज का निरीक्षण करते हैं। इसी वजह से जब कभी मेंटेनेंस कार्य चलता है तो ट्रेने थोड़ी लेट भी हो जाती हैं। पुल के बेस की जांच मशीनों से कराई जाती है। पुराने पुलों की लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। कमियां मिलने पर तुरंत दूर भी किया जाता है। जरूरत पड़ने पर नए पुल का निर्माण भी किया जाता है, अभी थर्ड व फोर्थ लाइन बिछाने के दौरान नए पुल भी बनाए जा रहे हैं।
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