ग्वालियर-
जयारोग्य अस्पताल में अवैध एम्बुलेंस पर हुई कार्रवाई के बाद एम्बुलेंस संचालक गुण्डागर्दी पर उतर आए हैं। शुक्रवार को जेएएच में किसी एम्बुलेंस या ऑटो को अंदर नहीं आने दिया गया। इतना ही नहीं सिक्युरिटी गार्डों ने जब रोका तो हंगामे पर उतारू हो गए। शवों को ले जाने के लिए जब लोगों को कोई सहारा नहीं दिखा तो जेएएच के हेल्प लाइन नंबर पर कॉल किया, पता चला कि एम्बुलेंस खराब है। पुलिसकर्मी एम्बुलेंस प्वाइंट पर बैठा दिए गए, मगर वह केवल मूकदर्शक बने तमाशा देखते रहे।
जेएएच में बीते रोज अवैध रूप से खड़ी होने वाली 33 एम्बुलेंस को जब्त करने की कार्रवाई की गई है। एम्बुलेंस संचालकों ने पूरी तरह से काम बंद कर दिया, यहां तक की जो 4 वैध एम्बुलेंस है, उनका भी संचालन नहीं होने दिया। शुक्रवार को जब लोग एम्बुलेंस प्वाइंट पर पहुंचे तो संचालकों ने मरीज या शवों को ले जाने से इंकार कर दिया। लोगों ने बाहर से एम्बुलेंस या ऑटो लाने का प्रयास किया तो एम्बुलेंस संचालकों ने हंगामा करते हुए उनको खदेड़ दिया। जिससे लोगों को खासी परेशानी झेलना पड़ी। कमलाराजा अस्पताल में एक महिला की मौत हो गई। विकलांग पति करीब दो घंटे तक इधर उधर भटकता रहा, लेकिन एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। जब बोर्ड पर लिखे हेल्प लाइन नंबर पर फोन किया तो वर्कशॉप इंचार्ज लक्ष्मीनारायण ने बताया कि शव वाहिका खराब है। जब जेएएच के सहायक अधीक्षक डॉ विनीत चतुर्वेदी को मामले की जानकारी लगी तो एम्बुलेंस का इंतजाम कर शव को घर पहुंचाया गया।
टीआई बोले-एम्बुलेंस दिलाना मेरा काम नहीं:
मुरैना निवासी संगीता शर्मा आग से झुलस गई थी। जयारोग्य अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद मुकेश पाठक काफी देर तक एम्बुलेंस के लिए इधर उधर परेशान होते रहे। एम्बुलेंस प्वाइंट पर पहुंचे तो संचालकों ने डेडबॉडी ले जाने से इंकार करते हुए वहां मौजूद टीआई से बात करने के लिए भेज दिया। मुकेश पाठक के मुताबिक जब टीआई से एम्बुलेंस के लिए कहा तो उनका कहना था कि ये मेरा काम नहीं है। परेशान होकर मुकेश बाहर से एक लोडिंग वाहन लेकर आए, जिसमें शव को रखकर वह मुरैना ले गए।
सुबह से भटकते रहे, लोडिंग मंगाकर ढोया शवः
नारायण आदिवासी पिता सीताराम निवासी धनोती सबलगढ़ उम्र 30 साल की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। मृतक का पीएम सुबह हो गया, लेकिन एम्बुलेंस के चक्कर में दोपहर तीन बजे तक डेडबॉडी परिजन घर नहीं ले जा सके। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो भाई श्रीपाल आदिवासी ने गोद में उठाकर शव को जेएएच के बाहर ले जाने का निर्णय लिया। मृतक के दोनों भाई बॉडी लेकर कुछ दूर चले ही थे कि एक परिजन बाहर से एक लोडिंग लेकर पहुंच गया। जिसमें रखकर बॉडी को सबलगढ़ ले जाया गया। इसकी एवज में साढ़े पांच हजार चुकाने पड़े।
7 माह से बंद शव वाहिकाः
कमलाराजा अस्पताल में बोर्ड पर शव वाहिका के लिए हेल्प लाइन नंबर लिखे हुए हैं। जबकि शव वाहिका 7 माह से बंद है। एक्सीडेंट के बाद खराब शव वाहिका को अब तक रिपेयर नहीं कराया जा सका है। साथ ही पहले दो ड्रायवर स्वीकृत थे, जब ठेका खत्म हुआ तो दोबारा रिन्यू नहीं किया गया। इसलिए अब शव वाहिका को चलाने के लिए जेएएच में ड्रायवर तक नहीं है
loading...
बढ़ता कारवाँ | समाजवाद की ओर बढ़ते कदम… India's #1 Leading News Portal