ग्वालियर-
मप्र में कमलनाथ सरकार के छह महीने पूरे होने के बाद जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों से मंत्रियों में असुरक्षा की भावना दिखाई दे रही है। कुछ मंत्री की सक्रियता बढ़ गई है तो कुछ परफार्मेंस के नाम पर हटाए जाने की अटकलों से सहमे से हैं। दूसरी तरफ, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री लामबंद होने लगे हैं। पहले दिल्ली में वे सिंधिया से मिलकर आए और एक स्थान पर राजधानी भोपाल में डिनर पर एक साथ बैठे। यह भी चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के कारण पनपने वाले असंतोष के मद्देनजर इसे विधानसभा पावस सत्र के बाद तक के लिए टाला जा सकता है। इसमें सिंधिया की हार और रेत् के अवैध खनन की भी शिकायते हैं 

सिंधिया समर्थक मंत्रियों में गोविंद सिंह राजपूत, तुलसीराम सिलावट, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसौदिया, प्रद्युम्नसिंह तोमर और डॉ. प्रभुराम चौधरी को माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने रविवार की रात अपने एक साथी के बंगले पर डिनर पार्टी का आयोजन किया। इसमें आधा दर्जन मंत्री मौजूद थे। मंत्रियों ने अपनी-अपनी समस्याओं को एक-दूसरे के सामने रखा। कुछ मंत्रियों ने अपने विभाग के प्रमुख सचिवों के रवैए पर आपत्ति जताई तो कुछ ने अन्य स्टाफ के कामकाज के तरीके को काम में बाधा बताया।
मंत्रियों ने परफार्मेंस को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि नौकरशाही काम में आड़े आएगी तो वे क्या करेंगे? यह भी आरोप लगाया गया कि जानबूझकर उन्हें ऐसे अड़ियल अफसर दिए गए हैं, जिनके कारण फैसलों में देरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह सिंधिया समर्थक मंत्रियों ने दिल्ली में ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात की थी। उनकी यह मुलाकात मुख्यमंत्री कमलनाथ के दिल्ली में पहुंचने से पहले हुई थी और तब से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हुई थी। सूत्र बताते हैं कि सीएम के भोपाल लौटने के पहले सिंधिया समर्थक मंत्रिगणों ने एक साथ बैठकर रणनीति तैयार की। हालांकि सिंधिया समर्थक मंत्री और अन्य नेतागण इस बारे में बात करने से बच रहे हैं।
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