ग्वालियर
मुरार और ग्रामीण क्षेत्र की करीब 3 लाख लोगों की आबादी के बीच संचालित जिला अस्पताल खुद अव्यवस्थाओं से बीमार बना हुआ है। गंदगी, स्टाफ की कमी, अधूरी जांच, फोम के चीथड़े नुमा गद्दों पर यहां मरीजों को रखा जा रहा है। नतीजतन, मरीज का पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा और स्वास्थ्य में अपेक्षा के अनुरूप सुधार नहीं हो रहा। जबकि राज्य सरकार से मिलने वाले बजट और केंद्र-राज्य सरकार की दूसरी योजनाओं मद से इस अस्पताल में इलाज व व्यवस्थाओं पर हर महीने 18 से 20 लााख रुपए खर्च होते हैं। फिर भी अस्पताल में इलाज की व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हो पा रहीं। कलेक्टर अनुराग चौधरी ने भी इन अव्यवस्थाओं को लेकर सिविल सर्जन व सीएमएचओ को कई बार फटकार लगाई है लेकिन उसके बाद भी हालात नहीं सुधर रहे।
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