जेल में 20 साल सजा काटने के बाद ही कैदी छूटने का कर सकते हैं आवेदन
ग्वालियर-
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने शासन की रिट अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा कि आजीवन कारावास के कैदी 20 साल सजा पूरी होने के बाद ही छूटने का आवेदन कर सकते हैं। कैदियों के लिए 2012 की पॉलिसी का पालन किया जाएगा। इससे उन कैदियों को झटका लगा है जिनकी सजा 14 हो चुकी थी और रिहा करने के लिए जेल प्रशासन के पास आवेदन किया था।


केन्द्रीय जेल में सोबरन सिंह आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उन्हें सजा काटते हुए 14 साल से अधिक का समय हो गया था। उन्होंने जेल से रिहा करने के लिए आवेदन किया था, जिसे जेल प्रशासन ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सजा पूरी नहीं हुई है। इसके बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की। एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया। जिस दिन सजा हुई है, उसी दिन की पॉलिसी लागू होगी। इस आदेश के आने के बाद कैदियों ने रिहाई के लिए आवेदन लगा दिए थे। करीब 50 आवेदन लंबित थे। इसे ध्यान में रखते हुए शासन ने एकलपीठ के आदेश को युगलपीठ में चुनौती दी। शासन ने तर्क दिया कि वर्ष 2012 में रिहाई को लेकर पॉलिसी बदल गई है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे आरोपी 20 साल पूरे होने पर ही अपनी रिहाई के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे पहले नहीं। 14 साल में रिहाई का प्रावधान नहीं है। युगल पीठ ने शासन की अपील पर फाइनल फैसला सुनाया। वर्ष 2012 की पॉलिसी का ही पालन किया जाएगा। यानी कैदी सजा के 20 साल पूरे होने के बाद भी अपनी रिहाई का आवेदन कर सकते हैं। इस फैसले से 14 साल की सजा पूरी कर चुके कैदियों को झटका लगा है।
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